अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के तहत जनवरी माह में लगाए गए कैमरा ट्रैप मॉनिटरिंग के दौरान वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है. जिसमें उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग में मॉनिटरिंग के दौरान धारीदार लकड़बग्घा की उपस्थिति दर्ज की गई, जो क्षेत्र के लिए अत्यंत उत्साहजनक संकेत है.

Continues below advertisement

पांच अलग-अलग लोकेशनों पर दिखा धारीदार लकड़बग्घा

उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग में लगभग एक महीने तक चली गहन कैमरा ट्रैप निगरानी के बाद हाथीडगर और फॉण्टो इको टूरिज्म जोन की कुल पांच अलग-अलग लोकेशनों पर धारीदार लकड़बग्घा को कैप्चर किया गया है. विशेष बात यह रही कि हाथीडगर जोन की दो लोकेशनों पर इसका री-कैप्चर भी दर्ज किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह केवल भ्रमणशील उपस्थिति नहीं, बल्कि क्षेत्र में इसके नियमित विचरण का संकेत है.

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि, तराई पश्चिमी वन प्रभाग में यह इस क्षेत्र की पहली प्रमाणित उपस्थिति पाई गई है. इससे पहले साल 2012 में रामनगर वन प्रभाग के हाथी गलियार क्षेत्र में इसका कैमरा ट्रैप कैप्चर हुआ था. इसके अतिरिक्त साल 2021 में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ क्षेत्र में इसके देखे जाने के साक्ष्य प्राप्त हुए थे.

Continues below advertisement

मृत पशुओं को खाकर जंगल को स्वच्छ रखने में देते हैं योगदान

धारीदार लकड़बग्घा एक निशाचर और शर्मीला जीव है, जो पारिस्थितिक तंत्र में सफाईकर्मी की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह मृत पशुओं को खाकर जंगल को स्वच्छ रखने में योगदान देता है और जैव विविधता के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है. इसकी उपस्थिति किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का संकेत माना जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण प्रयासों, बेहतर निगरानी व्यवस्था और आवासीय सुधार के कारण वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ रही हैं. धारीदार लकड़बग्घा का यह दस्तावेजीकरण तराई क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है.