उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तपस्वी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए. यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें कानून के तहत सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए.

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परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अपील करते हुए कहा कि वे इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक दलों का माध्यम न बनें. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस विषय पर राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि ये दल वास्तव में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध चाहते हैं तो उन्हें सरकार को औपचारिक रूप से लिखित प्रस्ताव देना चाहिए. इस तरह से राजनीति नहीं करनी चाहिए.

'सीएम योगी के बयान पर करें प्रायश्चित'

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए विवादित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए परमहंस आचार्य ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपने शब्दों के लिए प्रायश्चित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी दयालुता के लिए जाने जाते हैं और यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनसे क्षमा मांगते हैं तो मुख्यमंत्री उन्हें क्षमा भी कर सकते हैं.

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'सरकार पर दबाब बनाना अनैतिक'

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दिए गए 40 दिन के अल्टीमेटम पर परमहंस आचार्य ने कहा कि सरकार पर किसी भी प्रकार का अनैतिक दबाव बनाना उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी देश को अचानक हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जा सकता और उसी तरह गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध भी एक दिन में लागू करना संभव नहीं है.

परमहंस आचार्य ने कहा कि मर्यादा का पालन सभी को करना चाहिए और सार्वजनिक जीवन में दिए गए बयानों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. यहां बता दें कि परमहंस आचार्य अक्सर कई धार्मिक और राजनैतिक मामलों में बयानबाजी से चर्चा में रहते हैं.