उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दाखिल हुई आपत्तियों के आंकड़ों में एक चौंकाने वाला पैटर्न देखने को मिला है, राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर नाम हटाने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन डालने वाले पांच व्यक्ति बीजेपी से जुड़े बताए जा रहे हैं, और इनमें से चार सीटों पर जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई. वे सभी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.
एक-एक व्यक्ति की ओर से दाखिल आपत्तियों की संख्या 230 से लेकर 4,855 तक है. वहीं तीन सीटों पर कुल आपत्तियों में से 49 से 99 फीसदी तक फॉर्म अकेले एक ही व्यक्ति द्वारा भरे बताए जा रहे हैं.
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किच्छा में अकेले एक ही शख्स ने भरे 4,855 फॉर्म
सबसे चौंकाने वाला मामला ऊधमसिंह नगर की किच्छा सीट से है, जहां नाम हटाने के लिए कुल 4,857 आपत्तियां दर्ज की गई. जिनमें से 4855 अकेले राजेश तिवारी नामक व्यक्ति ने दाखिल कीं, तिवारी को बीजेपी का बूथ लेवल एजेंट बताया जा रहा है. इन आवेदनों में शामिल सभी मतदाता मुस्लिम हैं और ज्यादातर मामलों में वजह पहले से ही नामांकित या मतदाता के किसी दूसरी जगह शिफ्ट हो जाने को बताया गया है.
बीजेपी के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का दावा है कि पार्टी की बूथ स्तरीय आंतरिक जांच में किच्छा में 8 हजार से ज्यादा ऐसे मतदाता मिले जिनके नाम उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत और रामपुर की सूचियों में भी दर्ज हैं.
गदरपुर सीट पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. यहां 1,370 आवेदनों में से 670 अकेले चंकित हुरिया ने दाखिल किए हैं जो खुद को बीजेपी का बीएलए बताते हैं , हुरिया के मुताबिक उन्होंने पार्टी स्तर पर हुई जांच के बाद करीब 900 मतदाताओं की सूची तैयार की थी. जिनके नाम उत्तर प्रदेश से सटे इलाके में दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज था.
खटीमा में एक ही व्यक्ति की 99% आपत्तियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परंपरागत सीट खटीमा में भी यही ट्रेंड देखा गया. यहां आए 394 आवेदनों में से 392 यानी करीब 99 फीसदी बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष और बूथ लेवल एजेंट अमित कुमार पांडे ने दाखिल किए. इनमें भी सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के हैं. गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इसी सीट से शिकस्त दी थी. जिस वजह से खटीमा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सीट मानी जा रही है.
वहीं नानकमत्ता में दाखिल हुए 391 फॉर्म 7 आवेदनों में से 353 बीेजपी बीएलए किशोर जोशी की ओर से दिए गए हैं. जिनमें भी सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के हैं. इनमें से 351 आवेदनों में वजह शिफ्टेड यानी दूसरी जगह चला जाना बताई गई. जोशी का कहना है कि बीजेपी के 142 बीएलए की मदद से हुई आंतरिक जांच में ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में अपना पंजीकरण रद्द कराए बिना उत्तराखंड में भी नाम दर्ज करा लिया था.
रुद्रपुर सीट पर भी कुल 2818 आवेदन दाखिल हुए हैं. जिनमें सबसे बड़ी सूची बीजेपी के एससी मोर्चा के शहर महासचिव और बीएलए सनी पासवान की रही जिन्होंने 230 नाम हटाने की मांग की है. इनके अलावा चार अन्य लोगों ने भी 100 से ज्यादा नामों पर आपत्ति जताई है और इन सभी सूचियों में भी मुस्लिम मतदाताओं के नाम ही शामिल हैं.
नियमों में बदलाव के बाद खुली छूट
बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल होने के पीछे चुनाव आयोग के नियमों में हुए बदलाव को भी एक अहम वजह माना जा रहा है. 2023 के वोटर लिस्ट मैनुअल के मुताबिक किसी बूथ लेवल एजेंट के लिए एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन दाखिल करने और बड़ी संख्या में आवेदन आने पर अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था थी. हालांकि बाद में यह सीमा कुछ राज्यों में बढ़ाकर 50 प्रतिदिन कर दी गई.
वहीं इस साल जनवरी में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए एक पत्र में आवेदनों की सीमा पूरी तरह हटाने का जिक्र सामने आया था, जिसका हवाला देते हुए उत्तराखंड के एक निर्वाचन अधिकारी (ERO) ने भी कहा कि कोई भी व्यक्ति कितने भी फॉर्म जमा कर सकता है. हालांकि उत्तराखंड SIR के लिए इस बारे में अलग से कोई स्पष्ट आदेश जारी हुआ है या नहीं इस सवाल पर संबंधित अधिकारी की तरफ से कोई साफ जवाब नहीं मिल सका.
आगे क्या - बिना सुनवाई किसी का नाम नहीं कटेगा
दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 13 अगस्त को समाप्त हो चुकी है. अब 11 सितंबर तक नोटिस भेजने और सुनवाई की प्रक्रिया चलेगी, जिसके बाद 15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी. बीते 14 जुलाई को जारी की गई ड्राफ्ट सूची में करीब 71.3 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि इससे पहले यह संख्या लगभग 79.6 लाख थी.
उत्तराखंड निर्वाचन आयोग का कहना है कि बड़ी तादाद में आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आए हैं. इसलिए हर मामले में क्रॉस वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य है , आयोग के मुताबिक हर आपत्ति की औपचारिक जांच और सुनवाई के बाद ही उस पर फैसला होगा. खटीमा के ERO ने भी जानकारी दी है कि आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति से उसके दावों के आधार पर संपर्क किया जा चुका है और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका देने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि फील्ड वेरिफिकेशन, नोटिस और प्रभावित मतदाता की सुनवाई पूरी हुए बिना किसी का नाम सूची से नहीं काटा जाएगा.
इस पूरे मामले पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने सफाई देते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि कोई मतदाता गलत तरीके से सूची में दर्ज है या उसका नाम कहीं और भी दर्ज है तो वह आपत्ति दाखिल कर सकता है, और यह पूरी तरह चुनाव आयोग की जांच का विषय है. उनके मुताबिक वेरिफिकेशन में नाम सही पाए जाने पर उसे नहीं हटाया जाएगा. चमोली ने यह भी दावा किया कि यह आपत्तियां धर्म के आधार पर नहीं बल्कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर दर्ज कराई गई हैं.
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