भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा को बुलेट प्रूफ जैकेट मिलने के बाद सियासत तेज हो गई है. सुरेश राणा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा का स्तर तय करना सुरक्षा एजेंसियों का काम है. एजेंसियां अपने इनपुट के आधार पर ही सुरक्षा से जुड़े फैसले लेती हैं.
सुरेश राणा ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग सुरक्षा की चिंता नहीं करते, लेकिन सरकार और सुरक्षा एजेंसियां जो आवश्यक समझती हैं, उसी के अनुसार व्यवस्था करती हैं.
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'सुरक्षा एजेंसियों के पास जरूर कोई इनपुट होगा'
सुरेश राणा ने कहा कि सुरक्षा को लेकर जो भी निर्णय लिया जाता है, वह एजेंसियों के आकलन के आधार पर होता है. उन्होंने कहा कि नेताओं और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार समय-समय पर समीक्षा करती रहती है. उन्होंने कहा कि जो लोग जनता के बीच रहकर काम करते हैं, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण जनता का विश्वास होता है.
सपा पर जातिगत राजनीति करने का आरोप
सुरेश राणा ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा लगातार अपने बयान और रुख बदल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जातिगत आधार पर टिप्पणियां करती है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने PDA को लेकर जो बात कही है, उस पर सपा की प्रतिक्रिया से साफ है कि पार्टी खुद भ्रमित है.
'राजनीति में शब्दों की मर्यादा जरूरी'
पूर्व मंत्री ने कहा कि राजनीति में शब्दों की गंभीरता और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने सपा नेताओं के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज के लोगों को आहत करते हैं. सुरेश राणा ने जयंत चौधरी और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों और समाज से जुड़े नेताओं पर टिप्पणी करते समय नेताओं को सोच-समझकर बोलना चाहिए.
PDA और बयानबाजी पर बढ़ा सियासी विवाद
उत्तर प्रदेश में PDA को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग जारी है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दल जातिगत राजनीति कर रहे हैं, जबकि सपा बीजेपी पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाती रही है. सुरेश राणा ने कहा कि राष्ट्र और समाज से जुड़े मुद्दों पर राजनीति में जिम्मेदारी के साथ बयान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाली राजनीति से बचना चाहिए.
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