उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा हाल ही में जारी की गई वाहन चालक पद की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट इन दिनों चर्चाओं में है. वजह है सूची में दर्ज अटपटे से नाम "Explore Gyan", और UKUL जिससे यह पूरी प्रविष्टि और भी संदेहास्पद नजर आती है. सूची सार्वजनिक होने के बाद से ही अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं. 

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लोगों का कहना है कि किसी सरकारी भर्ती परीक्षा की आधिकारिक मेरिट लिस्ट में इस तरह का नाम आना स्वाभाविक रूप से हजम नहीं होता. कई अभ्यर्थियों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह किसी डेटा एंट्री की लापरवाही का नतीजा हो सकता है, जबकि कुछ इसे आयोग की कार्यप्रणाली और सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर लापरवाही बता रहे हैं.

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पीडीएफ दस्तावेज के रूप में प्रसारित हुई सूची

गौर करने वाली बात यह है कि यह सूची मूल रूप से एक पीडीएफ दस्तावेज के रूप में प्रसारित हुई है, और कई बार ऐसी गड़बड़ियां पीडीएफ बनाने या प्रिंट करने के दौरान इस्तेमाल होने वाले किसी थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर, टूल या वेबसाइट के वॉटरमार्क अथवा "डेमो टेक्स्ट" के गलती से दस्तावेज में जुड़ जाने से भी हो जाती हैं.

मामले में क्या बोला आयोग

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह नाम वास्तव में किसी अभ्यर्थी का है, या यह किसी तकनीकी चूक का नतीजा है. हालांकि, इस संबंध में आयोग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. बावजूद इसके, इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कार्यशैली को लेकर पुराने सवालों को हवा दे दी है.

भर्ती प्रक्रिया में लग चुके हैं गड़बड़ी के आरोप

बता दें कि आयोग पहले भी पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विवादों में रह चुका है, जिसके चलते प्रदेश में युवाओं के बीच इस संस्था की साख पहले से ही कमजोर मानी जाती रही है. ऐसे माहौल में मेरिट लिस्ट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण दस्तावेज में इस तरह की चूक सामने आना अभ्यर्थियों के भरोसे को और प्रभावित कर सकता है.

अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग इस मामले की गंभीरता से जांच करे और स्पष्ट करे कि यह नाम तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम है या किसी अन्य कारण से सूची में शामिल हुआ. साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि भविष्य में ऐसी महत्वपूर्ण सूचियां जारी करने से पहले उनकी बारीकी से जांच-पड़ताल सुनिश्चित की जाए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति न बने इस मामले पर फिलहाल आयोग की ओर से इस विषय पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

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