उत्तर प्रदेश में मानसून की देरी ने चिंता बढ़ा दी है. मध्य जून तक प्रदेश में अमूमन मानसून सक्रिय हो जाता है, लेकिन इस बार अलनीनो के प्रबाव के चलते सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. जून में 50 फीसदी भी कम बारिश होगी, जबकि जुलाई से सितंबर के बीच भी सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं.

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मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि इस वर्ष बारिश 90 फीसदी से भी हम हो सकती है. जिस कारण कई इलाकों में सूखे जैसी भी स्थिति बन सकती है. अभी जून में तीसरे सप्ताह के बाद भी बारिश के आसार नहीं बन रहे.   

अलनीनो का असर-2015 जैसे हालात 

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यूपी में अलनीनो का असर 2015 जैसी स्थिति बना सकता है. उस साल जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से केवल 86 से 91 फीसदी बारिश हुई थी. इसके कारण सीजन में बोई जाने वाली फसलें जैसे धान,मक्का समेत खरीफ की फसलें प्रभावित हुईं थीं.यही नहीं तालाबों-पोखरों में पानी कम होने से सिंचाई प्रभावित हुई थी, जिसकी वजह से खाद्य महंगाई बढ़ गयी थी.

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देश में अभी 50 से 60 प्रतिशत जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है.15 जून तक 703 जिलों में से मात्र 103 जिलों में ही सामान्य बारिश हो रही है.महाराष्ट्र में भी कम जिलों में सामान्य बारिश हुई है. इस पैटर्न से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. 

अलनीनो का असर और बारिश 

2015 में अलनीनो का जबरदस्त प्रभाव था, जिसके चलते बारिश महज 86 फीसदी ही सिमट कर रह गयी थी. इसके बाद 2018 में अलनीनो थोडा कमजोर पड़ा जिसके चलते बारिश 90 फीसदी से थोडा अधिक हुई, जबकि 2023 में इसका असर मध्यम रहा और बारिश 94 फीसदी से अधिक रही.

ये फसलें होंगी प्रभावित 

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जून की बारिश खरीफ की फसलों के लिए काफी फायदेमंद रहती है. जिसमें टमाटर, लौकीम भिन्डी, और अन्य फसलों के साथ-साथ दलहन में अरहर, मूंगफली और धान की बुवाई प्रभावित होगी. इन फसलों के दाम बढ़ने से सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा.

उधर मौसम विभाग ने शुक्रवार को बी प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी की चेतावनी के साथ कई इलाकों में लू का अलर्ट भी जारी किया है. बांदा का तापमान लगातार बढ़ा हुआ है, वह देश का सबसे गर्म शहर रहा. मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिन मौसम में परिवर्तन नहीं होगा.

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