उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लेकर हर साल एक समस्या सामने आती है, जिसमें लोग ऑनलाइन स्लॉट बुक कर लेते हैं और फिर आते ही नहीं. इस वजह से जो श्रद्धालु सच में यात्रा करना चाहते हैं, खासकर बुजुर्ग और बच्चों के साथ आने वाले परिवार, उन्हें स्लॉट नहीं मिलता. इस समस्या से निपटने के लिए पर्यटन विभाग अब पंजीकरण पर 10 रुपये का प्रतीकात्मक शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है.

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चारधाम यात्रा के नोडल अधिकारी अमित लोहनी ने साफ किया कि यह प्रस्ताव अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है और कोई अंतिम आदेश नहीं आया है. उनका कहना है कि छोटी सी राशि भी फर्जी बुकिंग पर रोक लगाने में कारगर साबित हो सकती है, क्योंकि जब पैसे लगेंगे तो लोग सोच-समझकर रजिस्ट्रेशन करेंगे.

व्यवस्था सुधरेगी तो भीड़ पर भी रहेगी नजर

पंजीकरण शुल्क से सिर्फ डमी बुकिंग नहीं रुकेगी, बल्कि प्रशासन को यात्रियों की तारीखवार सटीक जानकारी भी मिलेगी. इससे भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्लानिंग और रूट मैनेजमेंट आसान होगा. QR कोड और डिजिटल पास के जरिये हर यात्री की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी, जिससे भगदड़ और जाम जैसी स्थितियों से बचा जा सकेगा.

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2013 की त्रासदी के बाद से यात्रियों के डिजिटल रजिस्ट्रेशन की अहमियत और भी बढ़ गई है. किसी आपदा की स्थिति में पंजीकृत यात्री का मोबाइल नंबर और इमरजेंसी संपर्क होने से रेस्क्यू ऑपरेशन कहीं ज्यादा तेज और असरदार हो जाता है.

कारोबारियों की मांग पर बनी उपसमिति

होटल और टूर-ट्रैवल एसोसिएशन की मांग पर गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक उपसमिति गठित की है. यह समिति जल्द ही अपनी सिफारिशें देगी और उम्मीद है कि एक-दो दिन में पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

ऋषिकेश स्थित चारधाम कार्यालय में हुई बैठक में होटल एसोसिएशन, टूर-ट्रैवल यूनियन और डांडी-कांडी संचालकों ने अपने सुझाव दिए. अगली बैठक तीर्थ पुरोहितों के साथ होगी, जिसके बाद यात्रा संचालन को अंतिम रूप दिया जाएगा. आयुक्त ने यह भी सख्त हिदायत दी है कि डग्गामार वाहनों पर कड़ी कार्रवाई होगी और पार्किंग की सुविधा केवल उन्हीं होटलों को मिलेगी जहाँ यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है.

कपाट खुलने की तारीखें भी हुई तय

इस बार गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर खुलेंगे. केदारनाथ धाम 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा. सरकार का दावा है कि इस बार यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाया जाएगा.