उत्तराखंड वन विकास निगम में वित्तीय अनियमितताओं का ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. निगम कर्मचारी संघ का दावा है कि अलग-अलग प्रभागों और डिपो में 20 से 25 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ियां हुई हैं. सबसे चौंकाने वाली बात है कि इतने बड़े घोटालों के बावजूद दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. 

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उत्तराखंड राज्य का जब गठन हुआ और वन विकास निगम बना, तभी से गड़बड़ी की नींव पड़ गई थी. 2,18,64,513 रुपये की देनदारियों और समायोजन में जमकर हेराफेरी के आरोप हैं. कई अधिकारियों से वसूली होनी थी लेकिन, नहीं हुई और बाकी जो बचा उसेचुपचाप बट्टेखाते में डाल दिया गया. दावा है कि एक अधिकारी से 48.16 लाख की वसूली तय थी लेकिन सिर्फ 1.09 लाख रुपये ही लिए गए. 

लालकुआं डिपो में 10 करोड़ का घोटाला

लालकुआं डिपो संख्या 4 और 5 में करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है. इस मामले में 4 अक्टूबर 2023 को वन मंत्री ने SIT जांच के आदेश दिए लेकिन, आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई और न कोई कार्रवाई की गई है. इस मामले में 115 घन मीटर अतिरिक्त लकड़ी जिसकी कीमत 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई और 60 घन मीटर की प्रजाति भिन्नता का मामला भी सामने आया था. 

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रामनगर और हरिद्वार में वित्तीय गड़बड़ी

पश्चिमी क्षेत्र रामनगर में 1.11 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला मई से अगस्त 2023 के बीच उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया. इस में भी फाइलें चली और पत्राचार तक बात सिमट कर रह गई. हरिद्वार खनन प्रभाग में साल 2023-24 में 1.22 करोड़ की अनियमितता हुई. फिर 2024-25 में भी खनन गेटों पर करीब 57 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई. 18 फरवरी 2025 तक तीन गेटों पर क्रमशः 18,88,879 रुपये, 18,30,987 रुपये और 20,13,292 रुपये की अनियमितता दर्ज की गई.

RFID और खनन नीति का मामला

खनन नीति 2016 और 2020 के तहत पारदर्शिता के लिए उपखनिज वाहनों पर RFID चिप लगाना अनिवार्य किया गया था. बावजूद इसके कई वाहन बिना वैध दस्तावेजों के धड़ल्ले से चल रहे हैं और उनसे मोटी रकम वसूल की गई. ये रकम बैंक की जगह कहीं और ही पहुँच गई. 

हैरान करने वाली बात है कि जिन कर्मचारियों ने इन घोटालों के खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें ही स्थानांतरण, निलंबन और प्रशासनिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा.  इस मामले पर प्रान्तीय अध्यक्ष टीएस बिष्ट ने जाँच की माँग की और कहा कि अगर हालात नहीं बदले तो संघ व्यापक आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने से भी नहीं हिचकेगा. 

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