Haridwar News: उत्तराखंड सरकार भले ही शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के तमाम दावे कर रही है लेकिन हकीकत तो ये है कि धरातल पर इसकी हालत बेहद खराब है. हम बात कर रहे हैं हरिद्वार के सरकारी स्कूलों की, जिनके ज्यादातर भवनों की हालत जर्जर हो चुकी है. जिसकी वजह से यहां पढ़ने वाले बच्चों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है. लेकिन शिक्षा विभाग को ये नज़र नहीं आता. यहां किसी स्कूल में टेंट के नीचे पढ़ाई हो रही है तो कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां भवनों की छत गिरने की वजह से बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर है. कई कमरों की दीवारों में मोटी-मोटी दरारें आ गई हैं. 

स्कूलों की हालत बेहद जर्जर

सरकार हर शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च करने का दावा भी करती है लेकिन इन स्कूलों की हालत कुछ और ही बयां कर रही है. हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित राजकीय प्राथमिक नंबर 12 स्कूल के टीचर सुधीर चौबे का कहना है कि हमारे स्कूल की बिल्डिंग जर्जर अवस्था में है जिस तरह की सुविधा दी जा रही है उसी हिसाब से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. क्लास रूम की छत गिरने के कारण बच्चों को बाहर पढ़ाया जाता है. स्कूल किराए पर है इस कारण मरम्मत का कार्य भी नहीं हो पा रहा है. 

खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

सुधीर चौबे ने कहा कि कई बार इस बाबत अधिकारियों का निरीक्षण किया गया मगर अब तक कोई कार्य नहीं हुआ. ये स्कूल तकरीबन 40 से 50 साल पुराना है. वहीं प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 का भी यही हाल है विद्यालय की छतों का लेंटर टूट कर गिर रहा है. दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें आ रखी है. इसलिए विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र छात्राओं को टीन की शेड में पढ़ाया जा रहा है. विद्यालय नंबर 5 का तो सबसे बुरा हाल है यहां पर भवन बिल्कुल भरभरा कर जमींदोज हो चुका है और बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं.

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बेसिक शिक्षा अधिकारी की दलील

इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी शिव प्रकाश सेमवाल का कहना है कि विभाग द्वारा जर्जर अवस्था के स्कूलों का निरीक्षण किया गया है. शासन द्वारा भी निर्देशित किया गया है की जर्जर स्कूलों का डाटा शासन को उपलब्ध कराया जाए. हमारे लिए भी काफी बड़ी चुनौती है. विभाग जल्द से जल्द जर्जर अवस्था वाले स्कूलों को सही कराने के वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है. जिले में कई सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए प्राइवेट संस्था की आगे आई हैं. वहीं ज्वालापुर स्थित एक स्कूल की जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा है इस कारण वहां निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है. 

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