उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 11 मार्च को उत्तराखंड का बजट पेश करेंगे और यह कोई सामान्य बजट नहीं होगा. चुनाव से पहले धामी सरकार का यह आखिरी पूर्ण बजट है, इसलिए हर आंकड़े में सियासत होना स्वाभाविक है. बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैण) में होगा. वहीं अधिसूचना जारी हो चुकी है.

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सरकरा की 1.20 लाख करोड़ तक बजट को ले जाने की तैयारी

पिछले साल बजट का आकार 1.01 लाख करोड़ रुपए था. इस बार सरकार इसे बढ़ाकर 1.15 से 1.20 लाख करोड़ तक ले जाने की तैयारी में है. जिसमें युवाओं, महिलाओं, पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है.

इस बार सरकार ने बजट बनाने का तरीका थोड़ा बदला है. मुख्यमंत्री धामी ने 7 फरवरी को चंपावत के बनबसा में 'बजट संवाद' किया, जिसमें किसान, उद्योगपति, महिला स्वयं सहायता समूह और विशेषज्ञ एक मंच पर आए. इस संवाद का मकसद यही था कि बजट सिर्फ फाइलों में न बने, बल्कि जमीन की जरूरतें भी उसमें दिख पाए.

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 'जीरो बेस्ड बजटिंग' के तहत पुरानी योजनाओं की होगी जांच

सरकार ने साफ किया है कि 'जीरो बेस्ड बजटिंग' के तहत अब कोई भी योजना सिर्फ इसलिए बजट में नहीं रहेगी क्योंकि वह पहले से चली आ रही है. अब हर योजना की उपयोगिता जांची जाएगी. विभागों से पिछले खर्च का हिसाब मांगा जा चुका है और थर्ड पार्टी ऑडिट भी करवाया जा रहा है. इस साल पहली बार महिलाओं के लिए अलग से जेंडर बजट डेटा तैयार होगा. साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च का अलग ब्योरा भी मांगा गया है, यह पहल अपने आप में नई है.

विपक्ष की सरकार को बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी

बजट का आकार बढ़ाना जितना आसान दिखता है, असल में उतना है नहीं. कुल बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज चुकाने में ही निकल जाता है. पिछले बजट में करीब 75 हजार करोड़ ही विकास कार्यों के लिए बचे थे. ऐसे में घाटे को काबू में रखते हुए विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए असली परीक्षा होगी.

गैरसैंण की ठंड में इस बार सियासी गर्मी जरूर देखने को मिलेगी, जिसमें विपक्ष बेरोजगारी, पलायन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. पांच दिन का यह सत्र छोटा भले ही हो, लेकिन 2027 की चुनावी जंग की बिसात यहीं से बिछनी शुरू हो जाएगी.