Chamoli Glacier Burst: उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली में भारत-चीन सीमा के पास शुक्रवार को आए भीषण हिमस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई. हिस्खलन में सीमा सड़क संगठन (BRO) के 54 मजदूर फंस गए, जिनमें से 8 की मौत हो गई, जबकि बाकी को सुरक्षित निकाल लिया गया है. घायलों को जोशीमठ के सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. 

चश्मदीदों के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर अचानक हिमस्खलन हुआ, जिसमें मजदूरों के कंटेनर बह गए. हादसे में बचने वाले विजय पांडे ने बताया, "हम कंटेनर में थे, तभी बर्फीला तूफान आया और कंटेनर बह गए. जब हमें होश आया तो हम बर्फ में दबे हुए थे. हमारे साथ नौ लोग थे, जिनमें से चार यहां भर्ती हैं."

चश्मदीदों ने बताया क्या हुआ था उस दिनवहीं, घायल मनोज भंडारी ने कहा, "यह सब इतनी तेजी से हुआ कि हमें संभलने का मौका तक नहीं मिला. हमारे कंटेनर पूरी तरह नष्ट हो गए. तूफान इतना शक्तिशाली था कि कुछ समझ ही नहीं आया." हादसे की सूचना मिलते ही सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं थी जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. 

शुरुआती दौर में खराब मौसम के बावजूद 60 घंटे तक चले राहत एवं बचाव कार्य में 200 से अधिक जवानों ने हिस्सा लिया. इस ऑपरेशन में सभी 54 मजदूरों को बर्फ से निकाला गया. लेकिन 8 लोगों की जान नहीं बच सकी.

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उत्तराखंड सरकार ने इस घटना को दुखद बताते हुए संवेदनाएं व्यक्त की हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "यह हादसा बेहद दर्दनाक है. प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया. 

इस बीच राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में मौसम खराब होने पर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके. विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल ही में इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई थी, जिससे हिमस्खलन की संभावना बढ़ गई थी. ऐसे पहाड़ी इलाकों में मौसम अचानक बदल जाता है, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं.