उत्तराखंड में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार सख्त रुख अपनाया है. कोडीन सिरप और अन्य प्रतिबंधित दवाओं की खुलेआम बिक्री पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने एक अलग तरह की रणनीति अपनाते हुए अधिकारियों की ड्यूटी बदलकर क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट छापेमारी कराई गई है. ताकि स्थानीय सांठगांठ का कोई असर न पड़े. 

इस कार्रवाई के लिए तीन टीमों का गठन किया  गया. जिनमें देहरादून के ड्रग कंट्रोलर को हरिद्वार, हरिद्वार के कंट्रोलर को देहरादून और नैनीताल के कंट्रोलर को ऊधम सिंह नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई. सभी अधिकारियों को सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश हैं. इस कार्रवाई में 4 कंपनियों पर एक्शन लिया गया, जिनमें से 2 को तत्काल सील कर दिया गया.

इन कंपनियों पर की गई कार्रवाई 

स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में हर्रावाला क्षेत्र में मैसर्स मेयस्टिक फार्मा हेल्थकेयर और ट्रस्ट वे फार्मास्युटिकल में गंभीर खामियां मिलीं और दोनों को मौके पर ही सील कर दिया गया. बहादराबाद स्थित मैसर्स एनिमेट्स लाइफ साइंस में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दवाओं के स्टॉक की बिक्री पर रोक लगा दी गई. मैसर्स फ्युटेक फार्मास्युटिकल का परिसर बंद मिला, जिस पर नोटिस चस्पा कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

आयुक्त ने लाइसेंस रद्द करने के निर्देश

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त सचिन कुर्वे ने इस छापेमारी पर दो टूक कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग समाज के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. अब निगरानी तंत्र को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया गया है. जो भी मेडिकल स्टोर या कंपनी बिना पर्चे दवा बेचते या रिकॉर्ड में हेरफेर करते पकड़ी गई, उसका लाइसेंस रद्द होगा और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा. दूसरे जिलों में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और खासतौर पर कोडीन सिरप जैसी उन दवाओं पर नजर रहेगी, जिनका नशे के रूप में धड़ल्ले से दुरुपयोग हो रहा है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यूटर्न! पहले कहा- गिरफ्तारी के लिए तैयार, अब जमानत के लिए पहुंचे हाईकोर्ट