उत्तर प्रदेश में न सिर्फ लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी बल्कि विधानसभा में विधायकों की संख्या भी बढ़ेगी. नारी वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के पश्चात होने वाले संभावित परिसीमन के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में 50 फीसदी सीटें बढ़ाए जाने का विचार हो रहा है.

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इस क्रम में उत्तर प्रदेश में लोकसभा के लिए न सिर्फ 80 की 120 निर्वाचन क्षेत्र होंगे बल्कि विधानसभा में भी सीटों की संख्या बढ़कर 605 होने की संभावना है. अगर ऐसा होता है कि एक अनुमान के मुताबिक यूपी के 75 जिलों में विधानसभा सीटों का औसत जो फिलहाल 3-5 निर्वाचन क्षेत्र है, वह बढ़कर 6-8 होने के आसार हैं. 

सीटें बढ़ीं तो एक क्षेत्र में कितनी आबादी?

आजादी के बाद देश में हुए पहले चुनाव की बात करें तो सन् 1951 में उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 6.32 करोड़ थी और 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में 347 सीटें थीं, यानी एक सीट पर औसतन करीब 1.82 लाख आबादी थी. इसके बाद सन् 1971 में आबादी बढ़कर लगभग 8.83 करोड़ हो गई और सन् 1973 के परिसीमन के बाद विधानसभा सीटें 425 कर दी गईं. इससे प्रति सीट आबादी लगभग 2.8 लाख हो गई. वर्ष 2002 में राज्य के बंटवारे के बाद सीटों की संख्या विधानसभा सीटें अभी भी 403 हो गई. इसके बाद वर्ष 2011 तक आते-आते आबादी लगभग 19.98 करोड़ हो गई फिलहाल 1 विधानसभा सीट पर औसतन लगभग 4.95 लाख आबादी हैं.

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अगर सीटों की संख्या 605 हो जातीं हैं तो हर विधानसभा में 2011 की आबादी के अनुसार 3.30 लाख की आबादी होगी. हालांकि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. परिसीमन होने के बाद संभावना है कि वर्ष 2032 में यूपी से 600 से ज्यादा विधायक चुने जाएं.

यूपी में फिलहाल साहिबाबाद, लोनी और मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र हैं जो आबादी के लिहाज से सबसे बड़े निर्वाचन क्षेत्र हैं. यहां क्रमशः 12 लाख, 8 लाख और साढ़े सात लाख से अधिक मतदाता हैं. वहीं सबसे छोटी विधानसभाओं में महोबा, सीसामऊ शामिल है.