Continues below advertisement

 भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी तेज कर दी है. बड़े नेताओं के प्रदेश दौरे शुरू हो चुके हैं, वहीं पार्टी ने जमीनी स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति भी लागू करनी शुरू कर दी है. बीजेपी की खास नजर उन 61 विधानसभा सीटों पर है, जहां वह पिछले तीन चुनावों से जीत दर्ज नहीं कर सकी है. इन सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर लाभार्थियों तक पहुंच बनाने और स्थानीय समीकरण समझने पर विशेष फोकस किया जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी इन सीटों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है. इसमें 2012, 2017 और 2022 विधानसभा चुनावों का विश्लेषण किया जाएगा. पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि किन बूथों पर वह कमजोर रही, किस सामाजिक समीकरण का असर पड़ा और किन इलाकों में विपक्ष ने सेंध लगाई. बीजेपी की रणनीति साफ है-हार के कारणों को समझकर उसी आधार पर जीत की नई रणनीति तैयार करना.

Continues below advertisement

पार्टी की यह रणनीति सिर्फ कागजी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की तैयारी भी की जा रही है. पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जिलों की 22 सीटों के साथ-साथ पश्चिमी यूपी के सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर की 13 सीटों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है.

इन इलाकों में बूथ कार्यकर्ताओं को हर महीने बैठक करने, ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुनने और उसके बाद बूथ स्तर पर चर्चा करने के निर्देश दिए गए हैं. कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर यह पता लगाने को कहा गया है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं. बीजेपी अब सिर्फ पोस्टर और बैनर की राजनीति के बजाय माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए बूथ स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर्फ बड़े चेहरों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर के छोटे-छोटे समीकरणों से जीता जाता है. यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी दो स्तरों पर काम कर रही है. एक तरफ बड़े नेताओं के दौरे के जरिए माहौल बनाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ संगठनात्मक माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए जमीन पर जीत की पटकथा लिखने की तैयारी की जा रही है.