उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जनपद में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) प्रक्रिया के तहत दादरी विधानसभा क्षेत्र में 18 हजार से अधिक नए मतदाता जुड़ने के बाद यह जनपद की सबसे बड़ी विधानसभा बन गई है, जबकि अब तक पहले स्थान पर रहने वाला नोएडा दूसरे स्थान पर खिसक गया है.

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एसआईआर के जारी आंकड़ों के अनुसार दादरी विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 6,05,204 हो गई है. जबकि नोएडा में 5,87,195 और जेवर में 3,12,683 मतदाता दर्ज किए गए हैं. इससे पहले एसएसआर प्रक्रिया के पूर्व नोएडा विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़ा था, जहां कुल 7,71,082 मतदाता थे, लेकिन पुनरीक्षण के दौरान नामों में संशोधन और विलोपन के चलते संख्या में बदलाव आया.

दादरी बनी जनपद की सबसे बड़ी विधानसभा

जानकारी के अनुसार दादरी में मतदाता संख्या में यह बढ़ोतरी व्यापक जन जागरूकता अभियान और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार दादरी में 42,533 नए मतदाता जोड़े गए, जिससे इसकी स्थिति और मजबूत हो गई. वहीं मतदाता सूची से अपात्र नामों को हटाने का कार्य भी समानांतर रूप से किया गया, जिससे सूची अधिक सटीक और पारदर्शी बन सकी.

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इस क्षेत्र में लिंगानुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है. दादरी विधानसभा क्षेत्र में अब प्रति 1000 पुरुषों पर 844 महिलाओं का अनुपात हो गया है, जो पहले की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता है. यह सुधार महिला मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चलाए गए विशेष अभियानों का परिणाम माना जा रहा है.

सूची के बाद भी भर सकेंगे फॉर्म-6

जिला निर्वाचन अधिकारी मेधा रूपम ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाता आवेदन कर सकते हैं. इससे आने वाले समय में मतदाताओं की संख्या में और वृद्धि संभव है. उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और समावेशी बनाना है.

निर्वाचन विभाग ने एसआईआर से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने प्रभावी ढंग से कार्य करते हुए दादरी विधानसभा को जनपद में प्रथम स्थान पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 

इस बदलाव के साथ ही जनपद की तीनों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दलों के लिए नई रणनीतियां बनाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है, क्योंकि मतदाताओं की संख्या और संरचना में आए इस परिवर्तन का सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है.

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