उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान हो चुका है. विधायकों की संख्या के आधार पर आठ सीटों पर बीजेपी और दो पर समाजवादी पार्टी जीत सकती है. लेकिन बीजेपी के लिए कमजोर कड़ी इस बार ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के विधायक बन सकते हैं. कुल छह विधायक में से पहले से ही कई विधायक पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं. इसकी पुष्टि खुद कुछ समय पहले उनके बेटे अरुण राजभर कर चुके हैं.

Continues below advertisement

ओमप्रकाश राजभर के विधायकों में शामिल मऊ सदर से अब्बास अंसारी लगातार सपा के साथ दिख रहे हैं. इसके अलावा भी कई विधायक सपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा में है. बीजेपी अगर एक और सीट के लिए बढ़ती है तो उसके लिए राजभर की पार्टी के विधायक मुश्किल पैदा कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: रायबरेली पहुंचने से पहले अखिलेश यादव पर पोस्टर वार, पूछे गए ये सवाल

Continues below advertisement

विधानसभा में विधायकों की वर्तमान संख्या 

मौजूदा विधानसभा में 403 के मुकाबले 397 विधायक हैं. इसमें बीजेपी के पास 259 जबकि उसके गठबंधन के पास 295 विधायक हैं. सपा के पास 101, अपना दल सोनेलाल 13, राष्ट्रीय लोकदल 9, सुभासपा 6, निषाद पार्टी 5, कांग्रेस 2, जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक 2 और असंबद्ध विधायक 3 हैं. असंबद्ध विधायकों में मनोज पांडेय, राकेश सिंह और अभय सिंह शामिल हैं.

राज्यसभा का चुनावी गणित 

एक राज्यसभा के लिए 37 वोट चाहिए यानि दस सदस्यों के लिए पर्याप्त विधायक हैं. इसमें बीजेपी 7 सीटें आराम से जीत सकती है. दो सीट सपा. बीजेपी के पास  इसके बाद उसके पास 36 विधायक बचेंगे और सपा के पास 29. इस आखिरी सीट के लिए विधायकों का गणित गड़बड़ा सकता है. बीते राज्यसभा चुनाव की तरह क्या इस बार भी बगावत देखने को मिलेगी यह देखने वाली बात होगी.

राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों का गणित 10 उम्मीदवारों के लिए तो सही है अगर पिछली बार की तरह बीजेपी ने एक और उम्मीदवार खड़ा कर दिया तो विधायकों की टूट हो सकती है. लेकिन बीजेपी सुभासपा विधायकों पर तो बिल्कुल ही भरोसा नहीं कर सकती. ये बीजेपी का गणित बिगाड़ सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 'तो इकरा हसन हार जातीं...' INDIA अलायंस में फूट? कांग्रेस नेता का बड़ा बयान