उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में बहादुरपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम कनैला खुर्द में बुधवार को स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक बेहद अनूठे और प्रभावकारी जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया. ग्रामीणों और ट्री इनिशिएटिव्स सोसाइटी के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम में गांव की गलियों में अनोखी 'प्लास्टिक की अंतिम यात्रा' निकाली गई.
अभियान की विशेषता यह रही कि प्लास्टिक के कचरे और बोतलों आदि से एक प्रतीकात्मक शव तैयार किया गया, जिसे बाकायदा अर्थी पर सजाया गया. ग्रामीणों ने इस अर्थी को बारी-बारी से कंधा दिया और पूरे गांव में भ्रमण कराया. इस अनूठी शव यात्रा में पुरुषों के साथ-साथ गांव की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया.
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पारंपरिक तरीके से बनाई अर्थी
इस जन-जागरूकता यात्रा का शुभारंभ कनैला खुर्द स्थित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) से किया गया. प्लास्टिक के इस प्रतीकात्मक शव को तैयार करने और उसे पारंपरिक अर्थी का स्वरूप देने में ग्राम पंचायत के स्वच्छता कर्मी सूरज चक्रवर्ती का विशेष और सराहनीय योगदान रहा. यात्रा के दौरान अर्थी के ठीक पीछे पंचायत का कचरा ठेला भी चलाया जा रहा था, जो स्वच्छता और कचरा संग्रहण की व्यवस्था का प्रतीक बना.
शव यात्रा के दौरान ट्री इनिशिएटिव्स सोसाइटी के संस्थापक सदस्य राम कृष्ण पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अर्थी को कंधा देकर अपना समर्थन जताया. यात्रा जब गांव की गलियों से गुजरते हुए आदर्श प्राथमिक विद्यालय नकहा कनैला खुर्द के समीप पहुंची, तो विद्यालय के नन्हे-मुन्ने स्कूली छात्र-छात्राएं भी अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में इस अभियान में शामिल हो गए. बच्चों ने हाथों में कार्डबोर्ड से बनी तख्तियां और स्लोगन बोर्ड ले रखे थे, जिन पर स्वच्छता अपनाने और प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने का संदेश लिखा हुआ था. बच्चों की इस सहभागिता ने अभियान को और अधिक ऊर्जावान और भावनात्मक बना दिया.
पूरे गांव में शव यात्रा निकाली
पूरे गांव में भ्रमण के दौरान इस प्रतीकात्मक अर्थी को कुल पांच प्रमुख स्थानों व चौराहों पर जमीन पर रखा गया, जहां ग्रामीणों ने बारी-बारी से कंधा बदला. इन पड़ावों पर स्वच्छता कर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से रोकर और विलाप का अभिनय करके प्लास्टिक से प्रकृति को हो रहे नुकसान को दर्शाया. उन्होंने ग्रामीणों को प्लास्टिक के खतरों, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग निस्तारित करने की विधियों के बारे में विस्तार से समझाया.
अभियान की एक और सबसे अनूठी बात यह रही कि इसमें डिजिटल तकनीक और वित्तीय पारदर्शिता का भी समावेश दिखा. यात्रा के साथ चल रहे कचरा ठेले पर अंकित ऑनलाइन पेमेंट वाले क्यूआर कोड और उस पर लगी गुल्लक के माध्यम से कुछ जागरूक ग्रामीणों ने अपनी ओर से स्वेच्छापूर्वक पंचायत निधि में आर्थिक योगदान भी दिया.
कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए ट्री इनिशिएटिव्स सोसाइटी के अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि इस तरह की पहल का मुख्य मकसद स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्ति की मुहिम को सिर्फ कागजों या भाषणों तक सीमित न रखकर उसमें हर एक ग्रामीण की सीधी और व्यावहारिक भागीदारी सुनिश्चित करना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने गांव को स्वच्छ और हरा-भरा रखने की जिम्मेदारी पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर सिंगल यूज प्लास्टिक पर अपनी निर्भरता को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है.
ग्रामीणों को दी कचरा प्रबंधन की जानकारी
वहीं ग्राम पंचायत के स्वच्छता कर्मी सूरज चक्रवर्ती ने ग्रामीणों को घर-घर से निकलने वाले कचरे के उचित प्रबंधन की जानकारी दी. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों का कचरा इधर-उधर सड़कों या नालियों में फेंकने के बजाय पंचायत द्वारा निर्धारित व्यवस्था के तहत ही दें. उन्होंने गांव को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नागरिकों की नियमित और सक्रिय सहभागिता को अनिवार्य बताया. इस पूरे अभियान के जरिए कनैला खुर्द के निवासियों ने एक स्वर में संदेश दिया कि हमारा गांव, हमारी जिम्मेदारी और हमें हर हाल में सिंगल यूज प्लास्टिक से पूर्ण आजादी पानी है.
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