उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है. उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ड्राफ्ट सूची जारी हुई है.
कन्नौज सांसद ने निर्वाचन आयोग को 'बहरूपिया भेड़िया' बताया है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक कहानी साझा करते हुए अखिलेश ने लिखा- बाल-बोध कथा बहरूपिया भेड़िया.
अखिलेश ने लिखा कि एक समय की बात है, एक राजा के दरबार में एक शातिर ‘बहरूपिया’ रहता था. वह बहुरूपिया ‘भेड़िया’ बनकर राजा के लिए तरह-तरह के काम करता था. उसका असली काम था राजा के लिए घपले-घोटाले करके प्रजा को ठगना और राजा को ख़ुश रखना.
उन्होंने लिखा कि एक दिन, प्रजा के सामने उसकी असलियत खुल गयी. प्रजा ने उसे पकड़ लिया और राजा के सामने ले गई. राजा ने उसे देखकर कहा, 'मैं नहीं जानता कि यह कौन है.' राजा ने उस बहरूपिये को प्रजा को ठगने के नाम पर, देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल की काल-कोठरी में डाल दिया.
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सपा चीफ ने लिखा कि काल-कोठरी में बंद, लोगों को ठगनेवाला भेड़िया अब ख़ुद ठगा सा महसूस करता रहता था. एक दिन राजा जेल के निरीक्षण पर आया. भेड़िये ने सोचा शायद दरबार में प्रजा के सामने न पहचानने की मजबूरी रही होगी, इसीलिए राजा ने उसे नहीं पहचाना, तो एक बार यहाँ कोशिश करता हूँ, पुराना वफ़ादार हूँ यहाँ तो अकेले में ज़रूर पहचान लेंगे. ठग ने सलाखों से दोनों हाथ निकालकर पूरी ताक़त से पुकारकर कहा, 'महाराज, मैं आपका पुराना सेवक हूँ. मैंने आपके लिए बहुत तरह का काम किया है. याद आया?”
अखिलेश ने लिखा कि राजा ने कहा, 'मैं तुम्हें नहीं पहचानता. तुम कौन हो?' भेड़िया ने कहा, 'महाराज, आपने मुझे प्रजा को ठगने के लिए रखा था. अब कुछ याद आया?' राजा ने कहा, 'रखा नहीं था, इस्तेमाल किया था. मैं मानता हूँ कि इस्तेमाल करने के बाद कोई भी चीज़ बेकार हो जाती है. तुम ये भूल गये कि तुम भी प्रजा हो, जिसको अपने बारे में ही ज्ञान न हो, वो मूर्ख हमारे किस काम का? फिर तो उसे जेल में रखकर भी खर्चा क्यों करना?'
सपा चीफ का इशारा किस ओर?
सपा चीफ ने लिखा कि राजा ने दो क़दम पीछे हटते हुए, आगे कहा “प्रजा का हिस्सा होकर भी तुमने प्रजा से दगा किया, तुम्हें तो अपनों से दगा करने की सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन तुमने मेरी सेवा की, इसका इनाम भी मिलना चाहिए.”
उन्होंने लिखा कि भेड़िया बननेवाला बहरूपिया मन-ही-मन खुश हुआ, सोचने लगा कि शायद राजा मुझे माफ़ कर देंगे. लेकिन राजा ने अपना रेशम का साफ़ा उतारा और कारागार के मुख्य आरक्षी को देते हुए कहा, 'ये हमारा खास आदमी था, पर अब नहीं रहा. इसीलिए अब इसका काम ख़त्म हुआ. ये साफ़ा लो और इसका मजबूत रस्सा बनाओ, रेशम का साफ़ा रस्सा बनने के बाद काम तो करेगा लेकिन तकलीफ़ नहीं देगा, यही इसकी वफ़ादारी का सही इनाम है. कल सुबह इस रेशम के रस्से का क्या करना है. वो तो तुम जानते ही हो.' यह कहकर राजा मुँह फेर कर लंबे-लंबे क़दम भरता हुआ वहाँ से निकल गया. बहरूपिया पुकारता ही रह गया.
अखिलेश ने लिखा कि बहरूपिये को अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ, वो रात भर सोचता रहा. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. रेशम का साफ़ा, रेशम का रस्सा बन चुका था.
ड्राफ्ट रोल के बाद अखिलेश यादव का पहला बयान क्या?
बता दें एसआईआर के बाद यूपी में की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद सपा, आयोग पर हमलावर है. सपा ने सोशल मीडिया साइट्स पर आयोग और उसकी नीतियों पर सवाल उठाए हैं.
सपा चीफ ने भी एसआईआर को एनआरसी बताते हुए कहा- पहले दिन से हम लोग यह बात कहते रहे कि SIR नहीं, NRC है. SIR वोट काटने के लिए हो रहा है.
अखिलेश ने कहा था कि जिस SIR से ये पूरे देश को परेशान कर रहे थे, मैं उत्तर प्रदेश की जनता, PDA प्रहरी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इतनी मेहनत करके काम करके दिखाया कि आज SIR से बीजेपी परेशान है.