देहरादून में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे. प्रेस वार्ता कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई अहम बैठक के बाद की गई, जिसमें संगठनात्मक रणनीति और आगामी आंदोलनों पर विस्तार से चर्चा हुई. कुमारी शैलजा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से देश के करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार का अधिकार दिया गया. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कठिन समय में भी मनरेगा ने गरीब और कमजोर तबके को बड़ी राहत दी और उनकी आर्थिकी को मजबूत करने का काम किया, लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ने इस योजना पर लगातार चोट की है और बजट कटौती व भुगतान में देरी कर मजदूरों के हक छीने जा रहे हैं.

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आंदोलन कार्यक्रम का शेड्यूल जारी

प्रदेश प्रभारी ने मनरेगा को लेकर एक विस्तृत आंदोलन कार्यक्रम का शेड्यूल भी जारी किया. उन्होंने बताया कि 10 जनवरी को प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस की ओर से प्रेस वार्ताएं आयोजित की जाएंगी. 11 जनवरी को जिला स्तर पर मनरेगा वर्करों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक दिन का अनशन किया जाएगा. इसके बाद गांव-गांव, घर-घर चौपाल लगाकर आम लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा. इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चिट्ठियां भी जनता तक पहुंचाई जाएंगी.

31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला मुख्यालय पर होगा प्रदर्शन

उन्होंने बताया कि 30 जनवरी को शांतिपूर्ण तरीके से वार्ड स्तर पर धरना दिया जाएगा. वहीं 31 जनवरी से 6 फरवरी तक “मनरेगा बचाओ अभियान” के तहत हर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किए जाएंगे. इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी तक विधानसभा घेराव का कार्यक्रम रखा गया है. इस पूरे अभियान के दौरान चार बड़ी रैलियां भी आयोजित की जाएगी.

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कुमारी शैलजा ने उठाया अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा

कुमारी शैलजा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया. उन्होंने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड के कारण उत्तराखंड का नाम पूरे देश में बदनाम हुआ है. शैलजा ने आरोप लगाया कि इस मामले में सत्ता से जुड़े लोग भी शामिल हैं. उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा जज की निगरानी में कराई जानी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके.