Presidential Election: देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा इस वक्त यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज अधिसूचना जारी हो गई है. 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. देश को भी अगले राष्ट्रपति का इंतेजार है. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अब गोलबंदी भी शुरू हो गई है. विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उठाया है तो वहीं बीजेपी को उम्मीद है कि अपने घटक दलों के सहारे इस बार भी वह राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करेंगे.


18 जुलाई को होगा राष्ट्रपति पद का चुनाव
18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है. राष्ट्रपति का चुनाव अलग तरह का होता है. इस चुनाव में प्रेफ्रेंसियल वोटिंग होती है. इस चुनाव में विधायक, लोकसभा के सदस्य और राज्यसभा के सदस्य ही वोट देते हैं. हर एक वोट का वेटेज होता है. हर राज्य के विधायक के वोट का वेटेज भी अलग अलग होता है. इसी तरीके से सांसदों के वोट का भी वेटेज होता है. अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां विधायकों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है ऐसे में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का वेटेज सबसे अधिक होता है. जो तकरीबन 208 होता है. वहीं लोकसभा के सांसदों के वोट का वेटेज 700 और राज्यसभा के सदस्यों के वोट का भी वेटेज 700 होता है.


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यह होती है प्रक्रिया
हालांकि राष्ट्रपति चुनाव में विधान परिषद के सदस्य वोट नहीं देते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में वरीयता क्रम में वोट डाला जाता है. यानी इसमें वोटर को जो बैलट पेपर दिया जाता है उस पर निर्वाचन आयोग की तरफ से दिए गए पेन से ही अपनी प्रेफरेंस 1,2, या 3 लिखनी होती है. सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसमें आगे जीरो नहीं लगाया जाता वरना वोटर का वोट इनवैलिड हो जाता है. इसके अलावा वोटर अपने पेन का भी इस्तेमाल नहीं कर सकता क्योंकि अगर वह ऐसा करता है तब भी उसका वोट अवैध हो जाता है.


यह है यूपी का समीकरण
राष्ट्रपति चुनाव के लिए पूरे देश के विधायकों सांसदों के वोट का जो वेटेज है. वह तकरीबन 10,79, 206 है. इसमें उत्तर प्रदेश के विधायकों सांसदों का वोट का वेटेज तकरीबन 15 फीसदी के आसपास है जो लगभग 1 लाख 61 हजार 524 होता है. यूपी में 403 विधायक हैं और 80 लोकसभा के सांसद हैं. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 31 सीटें आती हैं. इन सबको इनके वोट वेटेज से गुणा करने पर कुल संख्या 1 लाख 61 हज़ार 524 आती है.


उप मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
अगर बीजेपी की बात करें तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी के 255 विधायक हैं ऐसे में उनका वोट वेटेज 53040 होता है जबकि बीजेपी की सहयोगी अपना दल के 12 विधायक हैं तो उनका वोट वेटेज 2496 होता है. निषाद पार्टी के भी 6 विधायक हैं तो वो भी वोट वेटेज 1248 होता है. जबकि बीजेपी के 63 लोकसभा सांसद हैं तो उनका वोट वेटेज 44100 होता है और अपना दल के दो सांसद हैं तो उनका वोट वेटेज 1400 होता है. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक साफ तौर पर कह रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो भी फैसला लेगा पार्टी उसी पर आगे बढ़ेगी.


ममता बनर्जी ने किया बैठक
 वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष को राष्ट्रपति चुनाव के लिए एकजुट करने की मुहिम शुरू की है आज उन्होंने दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ बैठक भी की. उत्तर प्रदेश से इस बैठक में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी भी शामिल हुए. समाजवादी पार्टी के विधायकों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में उनकी संख्या 111 है और उनका वोट वेटेज 23088 आता है. जबकि आरएलडी के 8 विधायक हैं तो उनका वोट वेटेज 1664 आता है. ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा के 6 विधायक हैं उनका वोट वेटेज 1248 आता है. ये कुल मिलाकर 26000 ही होता है. 


बैठक में नहीं बुलाया गया ओमप्रकाश राजभर को 
हालांकि इस बैठक में ओमप्रकाश राजभर को नहीं बुलाया गया उनके बेटे को विधान परिषद भी नहीं भेजा गया लेकिन फिर भी समाजवादी पार्टी के लोग कह रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर राष्ट्रपति चुनाव में भी उनके साथ ही रहेंगे. वहीं समाजवादी पार्टी के 2019 में 5 सांसद जीते थे लेकिन आजमगढ़ रामपुर में उप चुनाव हो रहे हैं ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी के तीन सांसद माने तो उनके वोट का वेटेज 2100 ही होता है. पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का साफ तौर पर कहना है कि विपक्ष इस बार एकजुट हो रहा है और भले ही उनकी यूपी में संख्या सत्ता पक्ष से कम हो लेकिन पूरे देश में विपक्ष के विधायकों की संख्या अधिक है और ऐसे में इस बार राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष का ही उम्मीदवार ही बाजी मारेगा ऐसी उन्हें उम्मीद है.


बसपा नहीं हुई बैठक में शामिल
भले ही बसपा का उत्तर प्रदेश में केवल एक ही विधायक हो लेकिन लोकसभा में बसपा के 10 सांसद हैं और उनका वोट वेटेज 7000 हो जाता है. ममता बनर्जी की इस बैठक में बसपा प्रमुख मायावती शामिल भी नहीं हुई हैं वहीं राजा भैया और उनकी पार्टी के एक और विधायक का रुख भी इस चुनाव में बीजेपी की ओर रहने के संकेत मिल रहे हैं.


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