उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश हुए योगी सरकार के बजट पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. अखिलेश यादव ने इसे विदाई बजट करार दिया. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत एक पहेली से की और कहा कि जब मुंह खोला तब बुरा बोला. अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट मौजूदा सरकार की विदाई तय करेगा.

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सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि हर साल बजट का आकार बढ़ाया जाता है और इस बार भी बजट पिछले साल से बड़ा है, लेकिन सरकार उसे खर्च ही नहीं कर पा रही. उनके अनुसार बजट बड़ा है, मगर खर्च नहीं हो रहा. इससे साफ है कि सरकार के लोग अयोग्य है.

अखिलेश यादव ने राज्य की अर्थव्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के हिसाब से उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी लगभग 90 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए, लेकिन वास्तविक आंकड़े अभी तक सामने नहीं आए हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की ग्रोथ रेट 30 प्रतिशत होनी चाहिए थी, मगर कृषि और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल रहा.

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सरकार बताए कि राशन ले रहे लोगों की कितनी आय- अखिलेश यादव

अखिलेश ने कहा कि सरकार विकसित भारत का सपना दिखा रही है, जबकि जमीनी सच्चाई अलग है. उन्होंने प्रति व्यक्ति आय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार बताए कि जिन लोगों को राशन दिया जा रहा है, उनकी आय कितनी है. निवेश के मोर्चे पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए, उनके मुताबिक 2023-24 में इन्वेस्ट यूपी के तहत बड़े दावों के बावजूद जमीन पर सिर्फ कुछ ही निवेश प्रस्ताव पहुंचे और करीब 4 हजार करोड़ रुपये का ही वास्तविक निवेश आया.

युवाओं को रोजगार देने में सरकार विफल- अखिलेश यादव

एमएसएमई सेक्टर पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि 92 लाख इकाइयों में से लगभग 82 लाख पंजीकृत ही नहीं हैं. उनका आरोप था कि नीतिगत ढील का सबसे ज्यादा असर इसी क्षेत्र पर पड़ेगा और युवाओं को रोजगार देने में सरकार विफल है. स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कई जिलों में गलत दवाएं दी जा रही हैं और दवा घोटालों के मामले सामने आ रहे हैं.

पुलिस व्यवस्था कमजोर हुई है और भ्रष्टाचार बढ़ा

वहीं अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस व्यवस्था कमजोर हुई है और भ्रष्टाचार बढ़ा है. उन्होंने कहा कि संगठित अपराध पर लगाम लगाने के बजाय व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है.