उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने नई चुनावी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में 18 जिलों में मिली हार और 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी ने कमजोर क्षेत्रों पर विशेष फोकस बढ़ा दिया है.

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बीजेपी अब सहारनपुर, मुरादाबाद, अयोध्या और आजमगढ़ मंडलों पर खास तौर पर ध्यान दे रही है. इन क्षेत्रों में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं का प्रवास बढ़ाया जाएगा. हारे हुए क्षेत्रों में मंत्रियों और संगठनात्मक नेताओं को तैनात करने की तैयारी चल रही है.

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ओबीसी वोट और पीडीए नैरेटिव की काट

2022 में बीजेपी को 57 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि सपा ने 64 सीटें बढ़ाई थीं. पार्टी की आंतरिक समीक्षा में ओबीसी वोट खिसकने और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के चलते बैकफुट पर आने की बात सामने आई. अब बीजेपी नए जातीय समीकरण तैयार कर रही है और विपक्षी गठबंधनों की काट तलाश रही है.

प्रशिक्षण शिविर और रोडमैप तैयार

बीजेपी हारे हुए क्षेत्रों में वोटरों के मनोविज्ञान समझने और कमल खिलाने का विस्तृत रोडमैप तैयार कर रही है. प्रशिक्षण शिविरों में तेज तर्रार वक्ताओं को प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. 2017 में 312 सीटों के बाद 2022 में झटका लगने के बाद पार्टी अब 2027 को प्रतिष्ठा का सवाल बना रही है.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, हार के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई है. कमजोर जिलों में संगठन को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर काम करने और विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है.

बीजेपी का मानना है कि सपा-रालोद-गठबंधन से 2022 में जो नुकसान हुआ, उसे 2027 में पूरी तरह उलटने की तैयारी चल रही है. पार्टी अब हर बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है.

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