सहारनपुर की देवबंद सीट जिले की सबसे मशहूर विधानसभा सीट है, जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है. देवबंद आए दिन किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहता है. बीजेपी और सपा दोनों का ही एक बड़ा वोट बैंक इस सीट पर माना जाता है. ऐसा कोई साल नहीं बीतता होगा जब देवबंद देश में चर्चा का विषय ना बने.
देवबंद विधानसभा की संख्या 5 है. देवबंद विधानसभा सीट से 2022 में बीजेपी के बृजेश सिंह विधायक बने. समाजवादी पार्टी के कार्तिकेय राणा की हार हुई थी. जबकि बसपा ने राजेन्द्र सिंह चौधरी और कांग्रेस ने राहत खलील को टिकट दिया था. हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही रहा था.
2026 में एसआईआर के बाद देवबंद विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3,16,497 है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त देवबंद सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 3,44,130 थी. यानि एसआईआर के बाद देवबंद सीट पर 27,633 मतदाता घटे.
2022 में देवबंद का सियासी समीकरण
चुनावी आंकड़ों पर नज़र डाले तो साल 2022 के विधानसभा चुनाव में देवबंद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को 93,890 वोट मिले, वहीं समाजवादी पार्टी को 86,786, बसपा को 52,732 और काँग्रेस को 1,096 वोट मिले.
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बृजेश सिंह ने 7,104 वोटों से जीत दर्ज की. सपा के कार्तिकेय राणा दूसरे नंबर पर रहे. सहारनपुर देहात की तरह देवबंद विधानसभा सीट पर बसपा को एक अच्छा ख़ासा वोट हासिल हुए. सहारनपुर की अन्य सीटों की ही तरह देवबंद में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा.
2022 में देवबंद विधानसभा सीट पर बीजेपी को 38.77 फीसदी, सपा को 35.83 प्रतिशत, बसपा को 21.77 प्रतिशत और कांग्रेस को 0.45 प्रतिशत वोट मिले. भाजपा और सपा के बीच 2.93 प्रतिशत वोट का फासला रहा और बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.
2024 में कैसा रहा राजनीति दलों को प्रदर्शन
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में देवबंद विधानसभा सीट पर किस पार्टी की क्या स्थिति रही-
1. भाजपा गठबंधन- 94,2892. सपा गठबंधन- 73,2383. बसपा- 48,243
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने एक बड़े फासले से देवबंद विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी. बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा 21,051 वोटों से सपा कांग्रेस गठबंधन के इमरान मसूद से आगे रहे. यानि 2022 के मुकाबले साल 2024 में बीजेपी ने इस सीट पर अपने जीत को बढ़त को बढ़ाया है. साल 2022 के चुनाव में बीजेपी मात्र 7,104 वोटों से जीती थी. लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनाव में देवबंद को बीजेपी ने 21 हजार से ज़्यादा वोटों से जीती.
बसपा अपना 2022 वाला प्रदर्शन 2024 में भी दोहराने में कामयाब रही. हालांकि साल 2022 के मुकाबले 2024 में बसपा को 4,489 वोट कम मिले. लेकिन इसके बावजूद भी बसपा अपने मूल वोट बैंक बचाने में कामयाब रही है.
यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि बीजेपी और सपा दोनों ने ही 2022 के विधानसभा चुनाव में क्षत्रिय समाज के नेता को टिकट दिया था. तब भाजपा और सपा के बीच हार जीत का अंतर 7,104 वोटों का था. लेकिन, साल 2024 के चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन से इमरान मसूद तो भाजपा आरएलडी गठबंधन से राघव लखनपाल शर्मा उम्मीदवार थे. यानि सपा कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी का सीधा लाभ भाजपा को पहुंचा और भाजपा के जीत का अंतर बढ़ गया.
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देवबंद विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
देवबंद विधानसभा सीट को समझने के लिए यहाँ के जातीय समीकरण पर भी ध्यान देना ज़रूरी है. यहां सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं, जिनकी संख्या 95 हजार है. दूसरे नंबर पर 58 हजार एससी वोटर, क्षत्रिय- 35 हजार, सैनी- 40 हजार, कश्यप- 30 हजार, गुर्जर- 25 हजार, त्यागी- 19 हजार, ब्राह्मण- 5 हजार, वैश्य- 5 हजार और 5 हजार जाट वोटर हैं.
देवबंद विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे ज़्यादा है. मुस्लिम के बाद एससी समाज का वोट अच्छी ख़ासी संख्या में है. लेकिन पिछड़े और अति पिछड़ों का वोट अगर एक साथ मिला दें तो यह लगभग 1 लाख वोट के आसपास पहुंचता है. इसके अलावा सामान्य वर्ग को वोट भी 50 हजार से ज़्यादा है.
बीजेपी इस सीट पर ओबीसी और सामान्य वर्ग के एक साथ मतदान करने की वजह से मजबूत स्थिति में रहती है. जबकि सपा भी मुस्लिम और ओबीसी वोट के भरोसे चुनाव लड़ती है.
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