उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई हैं. जहां भारतीय जनता पार्टी विरोधियों को पटखनी देने के लिए चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है तो वहीं समाजवादी पार्टी पीडीए फॉर्मूले साथ शंकराचार्य विवाद को हवा देकर सवर्ण वोटरों को लुभाने में जुटी है. बहुजन समाज पार्टी भी ब्राह्मण वोटरों पर अपने पक्ष में लाने के लिए प्रदेशभर में रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं. 

भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो बीते एक महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लखनऊ दौरे पर पहुंचे और यहां से बड़ा चुनाव संदेश देने की कोशिश की. 25 दिसंबर को पीए मोदी ने लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रवाद की बात की और इस स्थल को न सिर्फ वैचारिक स्थल बताया बल्कि पासी, बिरसा, मुंडा, सुहेलदेव, निषादराज के बलिदानों को भी याद किया. 

यूपी में 2027 की चुनावी बिसात बिछना शुरू

पीएम मोदी ने इस दौरान राष्ट्रवाद के सहारे सवर्णों के साथ दूसरे वर्गों की महान हस्तियों का स्मरण करते हुए सपा के पीडिए में सेंधमारी की कोशिश की. पीएम मोदी ने साफ सबका साथ, सबका विकास के नारे को मज़बूत करते हुए ये संकेत दिया कि बीजेपी प्रदेश में अपना दबदबा कायम रखेगी. वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और नए प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी मथुरा का दौरान कर अपना एजेंडे को आगे बढ़ा दिया है. 

इसके बाद 13 जनवरी को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी लखनऊ पहुंचे और जी राम जी के मुद्दे को लेकर सांसद और विधायकों को गांव-गांव जाने और चौपाल लगाकर उन तक पार्टी का संदेश पहुंचाने के निर्देश दिया. ताकि लोगों को जी राम जी के बारे में जानकारी मिल सके और वो विपक्ष के हमलों से भ्रमित न हो. 

अमित शाह ने भी दिया साफ संकेत

इस क्रम में 24 जनवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी लखनऊ पहुंचे और यूपी दिवस के मौके पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के बाद वन डिस्ट्रिक्ट वन फूड योजना की तारीफ की और कहा कि इससे रेहड़ी, ठेला और छोटे दुकानदार व उद्योगों को लाभ होगा. शाह ने इस दौरान सरकार और शीर्ष नेताओं के साथ बेहतर तालमेल पर भी ज़ोर दिया ताकि चुनावों में आपसी टकराव से बचा जा सके. 

बीजेपी के दिग्गज नेताओं के एक के बाद एक यूपी दौरे से साफ़ है भाजपा अभी से 2027 के चुनावों की तैयारी में जुटी है और हर स्तर पर पार्टी की रणनीति बनाने में जुटी है. दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी ये कहकर अपनी रणनीति साफ़ कर दी है कि ब्राह्मणों का सबसे ज्यादा भला बसपा सरकार में ही हुआ है. 

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