उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में 12 साल पहले हुए दिल दहला देने वाले पवन कुमार हत्याकांड में न्याय की जीत हुई है. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले को 'गंभीर से गंभीरतम' (Rarest of Rare) श्रेणी का अपराध मानते हुए चार दोषियों को मौत की सजा (फांसी) मुकर्रर की है. इसके साथ ही अदालत ने चारों पर कुल 1 लाख 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

Continues below advertisement

यह खौफनाक वारदात 14 जुलाई 2014 की है. शामली जिले के भभीसा गांव में हथियारों से लैस बदमाशों का एक गुट पवन कुमार के घर पहुंचा था. हमलावरों का असली निशाना पवन का भाई अशोक था. लेकिन, बदमाशों को देखकर अशोक ने खुद को एक कमरे में अंदर से बंद कर लिया और अपनी जान बचा ली. जब हमलावर अशोक तक नहीं पहुंच पाए, तो उन्होंने घर में मौजूद पवन कुमार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. गोली लगने से पवन कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी.

Continues below advertisement

'अमित शाह जवाब दें बयान नहीं, फिर चलेगी संसद', संसद के गतिरोध पर बोले अजय राय

विवाद की जड़: एक कहासुनी बनी मौत का कारण

सरकारी अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि इस हत्याकांड के पीछे एक मामूली सी कहासुनी थी. दरअसल, मृतक पवन के भतीजे की कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की मां के साथ कुछ कहासुनी हो गई थी. इसी बात की रंजिश रखते हुए विपुल खूनी ने अपने 5-7 गुर्गों के साथ मिलकर पवन के घर पर हमला बोल दिया था.

इन 4 दोषियों को मिली फांसी

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाह पेश किए गए. इनमें वादी मुकदमा अशोक (मृतक का भाई) और सोनबीरी (मृतक की पत्नी) की गवाही सबसे अहम साबित हुई. अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जिन चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई है, उनके नाम हैं:

  • रामवीर
  • राजीव उर्फ छोटू
  • राहुल उर्फ घोसी
  • हरेंद्र

मुख्य आरोपी का हो चुका है एनकाउंटर

इस मामले के मुख्य आरोपी और कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में पहले ही मौत हो चुकी है. वहीं, एक अन्य आरोपी अमित की पत्रावली विचारण (Trial) के दौरान अलग कर दी गई थी. कोर्ट ने विपुल खूनी के इन चारों सहयोगियों के कृत्य को समाज के लिए बेहद खतरनाक मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है.

महोबा: PDA महापंचायत में गरजे सपा नेता, 2027 में सत्ता परिवर्तन का दावा