उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 231 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।. सोमवार सुबह तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 231.50 मीटर के करीब दर्ज किया गया, और यह तेजी से बढ़ रहा है.
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने यमुना के उफान को और खतरनाक बना दिया है. हथिनीकुंड बैराज से रविवार को 1.79 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कैराना क्षेत्र में स्थिति गंभीर हो गई है.
फसलें हुईं चौपट-गांवों में दहशत
यमुना के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों और किसानों की फसलों पर पड़ रहा है. कई जगहों पर नदी का कटाव शुरू हो गया है, जिससे खेतों की मिट्टी बह रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं. किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से उगाई गई धान, गन्ना, और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं. वे सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. नदी के किनारे बसे गांवों जैसे भूरा, मलिकपुर, और पंजेटा में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों को आशंका है कि अगले 24 घंटों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है. लोग अपने घरों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं.
मौसम विभाग की चेतावनी
प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने के लिए बाढ़ खंड और राजस्व विभाग की टीमें तैनात की हैं. अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे न जाने और सतर्क रहने की अपील की है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन JCB मशीनों के जरिए नदी किनारे की सड़कों को मजबूत करने में जुटा है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा डाल रही है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है.
दो साल पहले भी खासा नुकसान हुआ था
2023 में भी यमुना का जलस्तर 497.9 फीट तक पहुंचा था, इस बार भी कैराना क्षेत्र में बाढ़ का खतरा गहराने से प्रशासन हाई अलर्ट पर है. लोग सरकार से समय पर राहत और बचाव कार्यों की मांग कर रहे हैं, ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके.