यूपी के शामली में हुई दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने शहर को जलमग्न कर दिया, जिससे नगर पालिका की सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई. इस बारिश ने जनपद में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसमें 500 से अधिक घरों में पानी घुस गया. सड़कें, गलियां और हाईवे तीन से चार फीट पानी में डूब गए, जिससे शहर नदी में तब्दील हो गया.

सीबी गुप्ता कॉलोनी, नेहरू मार्केट, कबाड़ी बाजार, और आर्यपुरी जैसे इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे फर्नीचर, बिस्तर और घरेलू सामान बर्बाद हो गया. स्थानीय लोगों को रातभर बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा. कुछ बच्चे कूलर और प्लास्टिक के टब में तैरते नजर आए, जबकि एक युवक की साइकिल पानी में डूब गई.

शहरवासियों का नगर पालिका पर फूटा गुस्सा

स्थानीय निवासियों का गुस्सा नगर पालिका की लापरवाही पर फूट पड़ा. उनका कहना है कि हर साल बारिश में शहर डूब जाता है, लेकिन नालों की सफाई नहीं होती. एक दुकानदार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सालों से टैक्स भर रहे हैं, लेकिन सफाई के नाम पर कुछ नहीं होता. नालियां कूड़े से भरी हैं और पानी निकलने का रास्ता ही नहीं है. लोग प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नगर पालिका को सफाई और जल निकासी के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट दिया जाता है.

2025 में 100 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पास हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभाव नहीं दिखा. नाले कूड़े से अटे हैं, और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

यातायात व्यवस्था हो गयी ठप

शहरवासियों ने बताया कि बारिश के बाद नेहरू मार्केट और कबाड़ी बाजार में व्यापार ठप हो गया. स्कूल की वैनें जलभराव में फंस गईं  और बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय युवकों को मदद करनी पड़ी.

100 करोड़ खर्च पर उठने लगे सवाल

इस आपदा ने नगर पालिका के दावों की हकीकत उजागर कर दी. लोग अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि अगर नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करेंगे. सवाल यह है कि आखिर 100 करोड़ का बजट कहां खर्च हो रहा है? अगर समय पर सफाई होती, तो क्या आज शामली पानी में डूबता?