उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का एक बयान सुर्खियों में है. उनके मदरसों को लेकर दिए गए बयानों पर सियासी और धार्मिक बहस तेज हो गई है. उनके इस बयान पर अब समाजवादी पार्टी ने पलटवार किया है. सपा विधायक अतुल प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का बयान दे रहे हैं.

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केशव मौर्य ने कहा था कि मदरसा बांग्लादेश का हो, चाहे पाकिस्तान का हो या चाहे भारत का हो, देखा जाये तो मदरसा अघोषित तौर पर आतंकवादियों को पैदा करने वाली फैक्ट्री है.  मौर्य ने ये बयान बांग्लादेश में मदरसों को लेकर लेखिका तस्लीमा नसरीन की हालिया टिप्पणियों को लेकर की थी. 

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सपा विधायक ने कहा- चोरी का मुद्दा डायवर्ट होने वाला नहीं

अतुल प्रधान ने कहा, "ये कितना भी इस मुद्दे को डायवर्ट करना चाहे ये चढ़ावा चोरी का मुद्दा डायवर्ट होने वाला नहीं है. जो इन्होंने मंदिर निर्माण में पैसा खाया और अब इसे डायवर्ट करने के लिए ऐसी बात कह रहे हैं." उन्होंने आगे कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ने हिसाब देंगे, जो चढ़ावा चोरी मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने की बात कर रहे था. धार्मिक रूप से लोगो को स्वतंत्रता है धर्म का प्रचार प्रसार की. हम लोग संस्कृत विद्यालय चलाते है ये लोग मदरसों की जांच कराकर खाली हिन्दू मुसलमान करना चाहते हैं.

मुस्लिम धार्मिक गुरु ने की आलोचना

वहीं, इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (AIMJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. बरेली में AIMJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मदरसों को लेकर दिए गए बयानों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताना इतिहास और आजादी की लड़ाई में दिए गए बलिदानों का अपमान है.

मौलाना ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम में मदरसों से जुड़े उलेमा और छात्रों ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और कई लोगों ने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी. उन्होंने कहा कि मदरसों का इतिहास हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में उपलब्ध है और ऐसे बयान देने से पहले उसे पढ़ना चाहिए. मौलाना ने आरोप लगाया कि मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने वाले बयान समाज में गलत संदेश देते हैं. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को तथ्यों और इतिहास के आधार पर ही अपनी बात रखनी चाहिए.

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