अलीगढ़ में सपा कार्यकर्ताओं पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पिस्तौल निकालने के मामले पर सियासत गर्म हो गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पिस्तौल निकाल रहे हैं वो भूल गए हैं कि अगर उनकी पढ़ाई रुकी होती तो वो ये नौकरी नहीं कर रहे होते. 

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अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर अलीगढ़ पुलिस का वीडियो शेयर किया, जिसमें सपा कार्यकर्ताओं जौहर यूनिवर्सिटी को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए प्रदर्शन करने पहुंचे थे. इस बीच जब सपा के महानगर अध्यक्ष मोहसिन मेवाती पुतला फूंकने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक पुलिसकर्मी अपनी पिस्तौल निकाल लेता हैं. जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को गुस्सा भड़क गया और माहौल तनाव पूर्ण हो गया. 

सपा मुखिया ने इसे लेकर निशाना साधते हुए कहा- 'पिस्तौल निकालनेवाले ये भूल गये कि अगर उनकी पढ़ाई बीच में रुक जाती, तो ये पुलिस की नौकरी इनके हाथ न आती. विश्वविद्यालय हमेशा आक्रांताओं ने तोड़े हैं, और कुछ नहीं कहना है.' 

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अलीगढ़ में प्रदर्शन के दौरान निकाली पिस्तौल

दरअसल ये घटना शुक्रवार की है जब सिविल लाइन थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जौहर यूनिवर्सिटी को तोड़ने से बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, इसी दौरान जब वो पुतला फूंकने की ओर बढ़े तो इंस्पेक्टर सिविल लाइन सत्यवीर सिंह ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई. सपा नेताओं का आरोप है कि इंस्पेक्टर ने उनसे बदसलूकी की और गाली गलौज करते हुए उन्हें बंद करने की धमकी दी. विरोध बढ़ा तो इंस्पेक्टर से पिस्तौल निकाल ली. 

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बता दें कि समाजवादी पार्टी रामपुर में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. इससे पर सपा के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 23 जुलाई को इस संबंध में रामपुर जिला प्रशासन से मुलाकात कर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए ज्ञापन भी दिया था और आज भी सपा के नौ सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलने रामपुर जाएगा. 

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