अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर आज सोमवार (6 जुलाई) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने वाली है. मगर इसी बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है, जिसमें बताया जा रहा है कि चंपत राय की जगह राम जन्मभूमि ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती हो सकते हैं.

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विश्व हिंदू परिषद समेत अयोध्या के तमाम संत महात्मा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ही चंपत राय की जगह ट्रस्ट के नए महासचिव के तौर पर देखना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्यों में इसे लेकर आम सहमति भी बन चुकी है. हालांकि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती इसके लिए कतई तैयार नहीं है. वह महासचिव के पद पर जाने के लिए साफ तौर पर मना कर रहे हैं.

चंपत राय दाग अपने ऊपर नहीं लेना चाहते स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती 

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का मानना है कि चंपत राय की वजह से ट्रस्ट की जो बदनामी हुई है, उसका दाग वह अपने ऊपर नहीं लेना चाहते हैं. चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष हैं और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी राम मंदिर आंदोलन से लेकर मौजूदा समय तक विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों की अगुआई करते रहते हैं.

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स्वामी वासुदेवानंद लंबे समय तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के तौर पर रहे हैं. हालांकि इलाहाबाद की जिला अदालत और हाई कोर्ट ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार किया था. इस बारे में उनका मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग चल रहा है.

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चंदा चोरी के चलते अपना पद भी छोड़ने की इच्छा जता चुके स्वामी

शंकराचार्य पद पर लंबे समय तक रहने की वजह से संत महात्माओं विश्व हिंदू परिषद और संघ में भी उनका काफी सम्मान है. स्वामी वासुदेवानंद के करीबियों का कहना है कि वह कतई महामंत्री का पद स्वीकार नहीं करेंगे. सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि चंदा चोरी की घटना से वह इतने मर्माहत है कि वह अपना पद भी छोड़ने की इच्छा जता चुके हैं. उनका कहना है कि ट्रस्ट से वह भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए जुड़े थे.

मंदिर निर्माण का काम पूरा हो चुका है, इसलिए वह अब ट्रस्ट में भी रहने के इच्छुक नहीं हैं  उनके इंकार की वजह से आज किसी को भी महामंत्री का पद दिए जाने की उम्मीद ना के बराबर मानी जा रही है. ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्य यह चाहते हैं कि मामला फिलहाल कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाए, बाद में स्वामी वासुदेवानंद की सहमति लेकर या किसी दूसरे नाम पर विचार कर नए महामंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा.

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