अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. इस बीच हनुमानगढ़ी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत संजय दास ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी (SIT) जांच कर रही है और सच सामने आना तय है.

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महंत संजय दास ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT बनाई है, इसलिए सच सामने आना तय है. राम मंदिर के चढ़ावे में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो और जो राजनीतिक पार्टियां भगवान राम के नाम का फायदा उठा रही हैं, वे ऐसा करना बंद करें."

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उन्होंने आगे कहा, "SIT इसी मकसद से बनाई गई थी कि जांच हो. इसलिए, किसी को भी दखल देने या कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है. हां, अगर सच सामने आता है, तो SIT पहले से ही जांच कर रही है."

SBI और ट्रस्ट की भूमिका पर क्या बोले महंत?

महंत संजय दास ने जांच के दायरे का जिक्र करते हुए कहा, "जहां तक SBI में जांच की बात है, SBI पैसे इकट्ठा करने जाती थी लेकिन बीच में किसी समय SBI ने वहां जाना बंद कर दिया. उसके बाद पैसा ट्रस्ट के जरिए आने लगा. वह जांच चल रही है. इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह SBI के कर्मचारी हों, ट्रस्ट के अधिकारी हों, ट्रस्ट के सदस्य हों या निचले स्तर के लोग हों, उन पर सख़्त कार्रवाई होगी."

रिटायर्ड इंजीनियर ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

विवाद उस समय और बढ़ गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर बड़े भ्रष्टाचार और 40 प्रतिशत कमीशन के घोटाले का आरोप लगाया.

वर्मा का दावा है कि कथित गड़बड़ियों को उजागर करने की वजह से उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.

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वहीं, सरयू नित्य आरती के प्रमुख महंत शशिकांत दास ने खुद को पूरे विवाद से अलग बताया. उन्होंने कहा, "मैं तो यह भी नहीं जानता कि दीनानाथ कौन हैं. सबसे पहले, मैंने जनरल सेक्रेटरी और मेरे पास आए ट्रस्ट के अधिकारियों को जमीन दी थी. मैंने उनके कहने पर ऑफिस बनाने के लिए उन्हें जमीन दी थी. मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है." फिलहाल, पूरे मामले में SIT की जांच जारी है और सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं.