Rajya Sabha Election 2024: दो साल पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए आरपीएन सिंह की राज्‍यसभा चुनाव में जीत से कुशीनगर में खुशी की लहर है. साल 2022 के विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस को झटका देकर भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा केन्‍द्रीय चुनाव समिति ने 11 फरवरी को राज्‍यों में होने वाले राज्‍यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए उम्‍मीदवारों के नामों की घोषणा की थी. इसमें भाजपा की ओर से उन्‍हें उम्‍मीदवार बनाए जाने के बाद जहां उनके लोकसभा चुनाव में लड़ने के संशय पर विराम लग गया. 
 
यूपी समेत कई राज्‍यों में मंगलवार को हुए राज्‍यसभा चुनाव में भाजपा के 8 प्रत्‍याशियों को जीत मिली है. वहीं सपा को दो सीटों पर जीत मिली है. भाजपा के आरपीएन सिंह 37 और संजय सेठ को 29 वोट मिले. इस चुनाव में जीत हासिल कर कमल खिलाकर उन्‍होंने शीर्ष नेतृत्‍व का विश्‍वास भी जीत लिया है. 


बीजेपी के आठ प्रत्याशी जीते 
आरपीएन सिंह पडरौना राजघराने के राजा हैं और कुर्मी-सैंथवार समाज लोगों के बीच उनकी अच्‍छी साख है. भाजपा केन्‍द्रीय चुनाव समिति की ओर से जारी की गई उम्‍मीदवारों की सूची में उत्‍तर प्रदेश से आरपीएन सिंह को 37, डा. सुधांशु त्रिवेदी को 38, चौधरी तेजवीर सिंह को 38, श्रीमती साधना सिंह को 38, अमरपाल मौर्य, डा. संगीता बलंवत को 38 और नवीन जैन को भी 38 मत मिले. इसके अलावा सपा से प्रत्‍याशी जया बच्‍चन को 41, सपा के आलोक रंजन को 19, सपा के रामजी लाल सुमन को 40 मत मिले.
 
आरपीएन सिंह 25 जनवरी 2022 को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे. उसी समय उन्‍हें राज्‍यसभा में भेजने की सुगबुगाहट चल रही थी. भाजपा शीर्ष नेतृत्‍व ने इसमें जल्‍दी नहीं दिखाई. आरपीएन सिंह कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद जब भाजपा में आए, तो उनके कुशीनगर से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने की भी खूब चर्चा हुई. लेकिन, उनकी और भाजपा की चुप्‍पी ने चर्चाओं पर विराम लगा दिया. 


इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले उनके नाम की चर्चा तेज हो गई. उम्‍मीद जताई जाने लगी कि उन्‍हें लोकसभा चुनाव में भाजपा कुशीनगर सीट से टिकट देकर ओबीसी वोट बैंक को बूते जीत की बिसात बिछा सकती है. लेकिन, भाजपा ने उन्‍हें राज्‍यसभा भेजकर इन कयासों पर भी विराम लग गया है. 


आरपीएन सिंह का सियासी करियर 
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह (रतनजीत प्रताप नारायण सिंह) ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उन्‍हें जीत हासिल हुई थी. उन्‍होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के स्‍वामी प्रसाद मौर्य को इस चुनाव में 21 हजार 94 मतों से हराया था. आरपीएन सिंह को 2,23,954 मत और स्‍वामी प्रसाद मौर्य को 2,02,860 मत मिले थे. साल 2014 में उन्‍हें भाजपा के राजेश पाण्‍डेय के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इस चुनाव में राजेश पाण्‍डेय के 370051 और आरपीएन सिंह को 2,84,511 वोट मिले.
 
साल 2019 में कांग्रेस ने फिर आरपीएन सिंह को चुनाव लड़ने के लिए कुशीनगर से टिकट दिया. लेकिन, इस बार वो तीसरे स्थान पर रहे. साल 2014 और 2019 के चुनाव में मोदी लहर में किसी पार्टी के प्रत्‍याशी कुशीनगर लोकसभा सीट से भाजपा के आगे नहीं टिक सके. इसके पहले ये सीट पडरौना लोकसभा सीट रही है. 2008 में इस निर्वाचन क्षेत्र को समाप्‍त कर दिया और कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र के नाम नई लोकसभा अस्तित्‍व में आई. 


आरपीएन सिंह पडरौना सीट से दो बार विधायक रहे. साल 2009 के चुनाव में कुशीनगर लोकसभा सीट से चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस की सरकार में सड़क परिवहन और पेट्रोलियम मंत्री रहे हैं. इस दौरान उन्‍हें गृह राज्‍यमंत्री भी बनाया गया. कांग्रेस का जनाधार खोने और उनके करीबियों के कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने के अलावा और कोई रास्‍ता नहीं बचा.


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