UP News: धर्म नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में दो दिन बाद से माघ मेले (Magh Mela) की शुरुआत हो रही है. तकरीबन डेढ़ महीने तक चलने वाले आस्था के सबसे बड़े मेले में देश - दुनिया से तकरीबन पांच करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है लेकिन मेला शुरू होने से ठीक पहले संगम (Sangam) और उसके आस-पास का गंगाजल इतना प्रदूषित होकर आ रहा है कि उसका रंग कहीं काला तो हीं मटमैला सा नजर आ रहा है.
गंगा की धारा के इस स्वरूप को देखकर साधु-संतों से लेकर कल्पवासियों और दूसरे श्रद्धालुओं में जबरदस्त नाराजगी है. संतों और श्रद्धालुओं ने मेला शुरू होने से पहले पतित पावनी कही जाने वाली गंगा की धारा को प्रदूषण मुक्त जाने की मांग की है. संतो और श्रद्धालुओं की नाराजगी को देखते हुए मेला प्राधिकरण भी हरकत में आ गया है. माघ मेला अधिकारी अरविंद सिंह चौहान ने इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट तलब करते हुए जांच बिठा दी है. अफसरों का कहना है कि इस बारे में सरकार को भी जानकारी भेज दी गई है. हालांकि रिपोर्ट आने से पहले ही अधिकारियों ने सफाई दी है कि गंगा में नालों और टेनरियों का गंदा पानी नहीं आ रहा है और गंगाजल का रंग सिल्टिंग और जलस्तर कम होने की वजह से बदला है. अफसरों का यह भी दावा है कि पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा तक व्यवस्थाएं पूरी तरह सुधार ली जाएंगी.
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अमेठी से आए हुए संत शिवयोगी मौनी महाराज का कहना है कि गंगा की यह दुर्दशा कतई ठीक नहीं है. यह भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है. इस बारे में लापरवाही बरतने वाले अफसरों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. तमाम दूसरे संतो और श्रद्धालुओं ने भी यही बात कही है. हालांकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं का मानना है कि संत संप्रदाय के योगी आदित्यनाथ के सीएम की जानकारी में जैसे ही यह मामला आएगा, वह जरूर दखल देंगे और मेला शुरू होने से पहले ही गंगा की धारा को अविरल और निर्मल करने के लिए कोई ना कोई कदम जरूर उठाएंगे. वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब माघ मेले के दौरान वे गंगा के प्रदूषण को लेकर संतों और श्रद्धालुओं को अपनी नाराजगी जतानी पड़ी हो. इस बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अफसरों को जरूरी हिदायत दी थी लेकिन लापरवाह अफसर कोर्ट के आदेश का भी अनुपालन नहीं करा सके. कहा जा सकता है कि नमामि गंगे के नाम पर अरबों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद अगर आस्था के सबसे बड़े मेले में गंगा की यह हालत है तो कहना गलत नहीं होगा कि यह प्रोजेक्ट सफेद हाथी साबित हो रहा है.
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