Prayagraj News: संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) के संगम क्षेत्र में गंगा किनारे कृत्रिम तालाब बनाकर मूर्ति विसर्जन की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है. बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके राय और अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की.

क्या है पूरा मामला?

याची अधिवक्ता वी सी श्रीवास्तव ने मूर्ति विसर्जन के संबंध में पूर्व में हाईकोर्ट के पारित आदेश की जानकारी दी. कोर्ट में कहा कि जिला प्रशासन कोर्ट आदेश की अवहेलना कर रहा है. जबकि कोर्ट का आदेश जिला प्रशासन पर बाध्यकारी है. याची अधिवक्ता ने कहा कि मूर्ति विसर्जन धार्मिक परंपरा और देवी भक्तों द्वारा शांति जल लिए जाने से जुड़ी हुई है. किसी भी स्थिति में मूर्ति विसर्जन गांव के गंदे तालाब में नहीं किया जाना चाहिए. जिला प्रशासन शहर से 15 किमी दूर प्राकृतिक तालाब में मूर्ति विसर्जन करा रहा है. जो कि सैकड़ों वर्ष पुराना है.

5 अक्टूबर को होना है विसर्जन

तालाब का पानी गंदा है, ऐसे तालाब में मूर्तियों का विसर्जन धार्मिक भावनाओं के अनुकूल नहीं है और न ही वहां किया जाना चाहिए. तर्क दिया गया कि प्रशासन कह रहा है कि वह गंगा के किनारे है और वहां गंगा का पानी ले जाया जा रहा है. जबकि, गंगा वहां से काफी दूर है. इसलिए पिछले वर्षों की भांति  गंगा के किनारे काली सड़क पर कृत्रिम तालाब बनाकर मूर्तियों का विसर्जन किया जाए. जवाब में सरकारी अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि बांध के नीचे की भूमि सेना की है.अंदावा का तालाब गंगा के किनारे है और मूर्ति विसर्जन की तैयारी जिला प्रशासन ने कर ली है. गौरतलब है कि पांच अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन किया जाना है.

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