प्रयागराज: मंगलवार को इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से राज्य की अदालतों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया है. कोर्ट ने पूछा कि राज्य की अदालतों में सुरक्षा, बायोमीट्रिक और सीसीटीवी कैमरे लगने में कितना वक्त लगेगा. बता दें कि जस्टिस सुनीत कुमार और जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने साल 2019 में बिजनौर की जिला अदालत में हुई गोलीबारी की घटना के बाद दायर इस जनहित याचिका पर सुनवाई की थी.

कोर्ट ने मांगा यूपी सरकार से जवाब

इस दौरान हाइकोर्ट ने यूपी सरकार को ये भी बताने के लिए कहा कि आजमगढ़ और लखनऊ की अदालत में बायोमीट्रिक कब तक लगाकर उसे शुरू कर दिया जाएगा. कोर्ट ने सरकार को ये जानकारी देने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया है. वहीं सुनवाई की पिछली तारीख पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल कर प्रत्येक जिला अदालत में तैनात सुरक्षा कर्मी और उसके वास्तविक मंजूर पद के बारे में बताने को भी कहा था.

2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

इससे पहले सितंबर 2021 में उच्च न्यायालय ने पाया था कि राज्य सरकार ने 20 फरवरी, 2020 से लंबित वित्तीय मंजूरी की वजह से निचली अदालतों में वकीलों और वादियों के लिए गेट ऑटोमेशन, बायोमीट्रिक प्रणाली और गेट पास से संबंधित कार्यों में कोई प्रगति नहीं की है. 20 दिसंबर, 2019 और दो जनवरी, 2020 के अपने आदेश के जरिए उच्च न्यायालय ने अदालत परिसरों में पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. बता दें कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख दो दिसंबर, 2021 तय की है.

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