उत्तराखंड के टिहरी जिले में पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. चुनावी साल से पहले इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक ओर विकास योजनाओं को गति देने का प्रयास दिखेगा, वहीं दूसरी ओर इसका स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी नजर आएगा. टिहरी झील किनारे कोटीकॉलोनी में प्रस्तावित जनसभा और साहसिक पर्यटन गतिविधियों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं.

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सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान टिहरी झील में बोटिंग कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि वे कोटीकॉलोनी से डोबरा-चांठी तक क्रूज या बार्ज बोट से यात्रा कर सकते हैं. इस पहल को टिहरी झील में पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अगर ऐसा होता है, तो यह क्षेत्र के साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है.

प्रधानमंत्री के संभावित दौरे को लेकर टीएचडीसी (THDC) और जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. विभिन्न समितियों का गठन कर अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं. हाल ही में टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक आरआर सेमवाल, एएसपी दीपक सिंह, एसडीएम कमलेश मेहता और जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा ने कोटीकॉलोनी क्षेत्र का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने झील में संचालित क्रूज और बार्ज बोट में जाकर सुरक्षा और संचालन व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया.

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इसके अलावा एसडीआरएफ की टीम ने भी सुरक्षा इंतजामों का परीक्षण किया. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक नहीं छोड़ना चाहती हैं. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कुछ समय के लिए झील में संचालित क्रूज बोट में रुक भी सकते हैं. साथ ही कोटीकॉलोनी के आसपास होमस्टे में उनके संभावित प्रवास को लेकर भी चर्चा है. इसके लिए सुरक्षा मानकों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों की पहचान की जा रही है.

इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना भी है. प्रधानमंत्री टिहरी बांध की 1000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना का लोकार्पण कर सकते हैं. करीब आठ हजार करोड़ रुपये की लागत से बनी यह परियोजना देश की पहली वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज योजना है. इसके शुरू होने से टिहरी बांध की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 2400 मेगावाट तक पहुंच जाएगी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को बड़ा लाभ मिलेगा.

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प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे से स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं. खासकर बांध प्रभावित परिवारों की पुनर्वास से जुड़ी लंबित समस्याएं, रायल्टी का मुद्दा, क्षेत्रीय विकास और प्रतापनगर क्षेत्र के फिकवाल समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किए जाने जैसे विषयों पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं. स्थानीय जनता को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल करेंगे.

राजनीतिक नजरिए से भी यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगले वर्ष उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में टिहरी में होने वाली यह जनसभा भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम साबित हो सकती है. टिहरी और उत्तरकाशी जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात पर भाजपा का कब्जा है, जबकि प्रतापनगर सीट कांग्रेस और यमुनोत्री सीट निर्दलीय विधायक के पास है. ऐसे में प्रधानमंत्री की यह जनसभा न सिर्फ विकास योजनाओं को गति देगी, बल्कि चुनावी माहौल में एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी देगी. कुल मिलाकर, टिहरी में प्रस्तावित यह दौरा विकास, पर्यटन और राजनीति, तीनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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