गोरखपुर: गोरखपुर के एक दंपत्ति ने प्राइवेट अस्‍पताल के चिकित्‍सकों के ऊपर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है. आरोप है कि जब उनके बच्‍चे का जन्‍म हुआ, तो उसके एक हाथ नहीं था. उन्‍होंने बताया कि पहले से अंत‍िम चरण तक अल्‍ट्रासाउंड करने वाले चिकित्‍सकों ने उन्‍हें बच्‍चा नार्मल होने की बात कही थी. उन्‍होंने ये नहीं बताया था कि भ्रूण का एक हाथ डेवलप नहीं हुआ है. नतीजा नवजात दिव्‍यांग पैदा हो गया. उन्‍होंने जिलाधिकारी, सीएमओ और आईजीआरएस पोर्टल पर इसकी शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

जांच रिपोर्ट में ठीक था बच्चा

गोरखपुर के सहजनवां के देईपार गांव के रहने वाले अभिषेक कुमार पाण्‍डेय की पत्‍नी अनुराधा पाण्‍डेय ने 15 अगस्‍त को जिला महिला अस्‍पताल में एक बच्‍चे को जन्‍म दिया. इसके पूर्व उन्‍होंने गर्भावस्‍था की शुरुआत से ही कई निजी चिकित्‍सकों और अल्‍ट्रासाउंड सेंटरों के यहां समय-समय पर अल्‍ट्रासाउंड कराया. उन्‍होंने बताया कि बच्‍चे का विकास ठीक ढंग से होने की जानकारी के लिए उन्‍होंने चिकित्‍सकों की सलाह पर लेवल-2 की जांच भी कराई. रिपोर्ट देखेने के बाद निजी चिकित्‍सकों ने पेट में पल रहे बच्‍चें को पूरी तरह से स्‍वस्‍थ बताते हुए इलाज किया गया.

बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग

15 अगस्‍त को बच्‍चे के जिला महिला चिकित्‍सालय में जन्‍म के बाद चिकित्‍सकों ने बताया कि बच्‍चा मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्‍यांग है. उन्‍होंने बताया कि जन्‍म के बाद पता चला कि उसका एक हाथ भी विकसित नहीं हो पाया है. इसके साथ ही उनके ललाट पर भी ढाल और उभार है. नवजात के जन्‍म के बाद नवदम्पति शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो गए. थक हारकर नवदम्पति ने जिलाधिकारी, सीएमओ और आईजीआरएस पोर्टल के माध्‍यम से निजी चिकित्‍सकों की शिकायत की और जांच कर कार्रवाई की मांग की.

सहजनवां के देईपार गांव के रहने वाले अभिषेक पाण्‍डेय की प्रेग्नेंट पत्नी अनुराधा पाण्‍डेय का इलाज गोरखपुर के नामचीन डॉक्टर अरुणा छापड़िया से चल रहा था. अभिषेक ने डॉक्टर की सलाह पर प्रत्येक जांच नियम से करवाया. प्रेग्नेंसी के 19 सप्‍ताह में डा. अंजू मिश्रा, 25 सप्‍ताह में जांच डा. नेहाल छापडि़या, 27 वें सप्ताह डॉक्टर अरुणा छापड़िया, 34वें सप्‍ताह में डॉ. कविता वर्मा द्वारा अल्‍ट्रासाउंड किया गया. Level-2 की अल्ट्रासाउंड जांच में भी बच्‍चे को पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ्‍य बताया गया. लेवल-2 की जांच में बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के बारे में जानकारी मिलती है.

लेवल 2 की जांच में भी स्वस्थ था बच्चा

बेतियाहाता स्थित डॉ. अंजू ने लेवल-2 की जांच के बाद इस दंपति को बताया कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है. रिपोर्ट में भी बच्चा पूरी तरफ से ठीक दर्शाया गया है. हालांकि level-2 में यदि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हो, तो लेवल 3 की जांच नही करनी पड़ती है. इसी रिपोर्ट के आधार पर अभिषेक ने पत्नी अनुराधा की डिलीवरी जिला अस्पताल में करवाई. जिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चे का एक हाथ का नहीं होना बताया गया. बच्‍चे को दिमागी रूप से भी अविकसित बताया गया.

सीएमओ ने कमेटी गठित की

इसके बाद दोनों पति-पत्नी ने प्राइवेट डॉक्टर की लापरवाही के खिलाफ मुकदमा करवाने के लिए अधिकारियों के चक्‍कर लगाना शुरू किया. हालांकि इस बीच जिला अस्पताल के सीएमओ डा. श्रीकांत तिवारी ने जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है. गठित टीम ने अपनी शुरुआती जांच में अल्ट्रासाउंड करने वाले को डॉक्टर पूर्ण रूप से दोषी पाया है. सीएमओ डा. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि निजी चिकित्‍सकों की जांच में लापरवाही सामने आई है. जिलाधिकारी, उन्‍हें और आईजीआरएस पोर्टल पर इसकी शिकायत की गई है. उन्‍होंने बताया कि जांच के बाद चिकित्‍सकों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है. हालांकि वे अभी अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हो पाए हैं.

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