उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र में गुरुवार (30 अप्रैल) को समाजवादी पार्टी की विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल का अलग अंदाज देखने को मिला. सपा विधायक पल्लवी पटेल ने कहा कि विधानसभा सत्र का एक और दिन भारतीय जनता पार्टी के षड्यंत्र की भेंट चढ़ गया. पल्लवी पटेल ने कहा कि असल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती है, वो आरक्षण जो कहीं ना कहीं लैंगिक बाध्यताओं को तोड़ता है और शायद इसीलिए उसमें परिसीमन और जनसंख्या जैसे सवालों को जोड़ के लंबित करने का काम किया गया.

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पल्लवी पटेल ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि इसी देश में महिला पहलवान सड़कों पर प्रदर्शन कर रही थीं, इसी देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ते हुए मजदूर अपने प्रदेशों को पलायन करने को मजबूर हैं. लेकिन अगर आप देखेंगे गौर से तो इन तमाम घटनाक्रम के बीच में हमारे देश का प्रधान सेवक गांधी जी के बंदर बने बैठे हुए हैं, वो कहीं झालमुड़ी खा रहे हैं तो कहीं फोटोग्राफी कर रहे हैं. कहीं बच्चों के साथ फुटबॉल फुटबॉल खेल रहे हैं, यह कैसा प्रधान सेवक है इस देश का जिसकी पॉलिटिकल पिकनिक खत्म ही नहीं हो रही है और आपके सामने यकायक ये महामानव अवतरित होते हैं.

सपा विधायक ने कहा कि आप इस देश में जनसंख्या के आंकड़े जनगणना के आंकड़ों को इस्तेमाल करते हुए परिसीमन करना चाहते हैं और महिलाओं की हिस्सेदारी देना चाहते हैं. तो फिर एक बात बताइए 2021 का सेंसस आपने क्यों नहीं कराया? तब आपने बहाना कह के 2021 के सेंसस को इसलिए टाल दिया कि कोविड का पेंडेमिक है. तो आपको थोड़ा सा याद दिला दूं कि इसी कोविड के पेंडेमिक के दौरान तमाम राजनीतिक मंच सजे थे, बिहार 2020 के चुनाव हुए थे, तमिलनाडु के चुनाव हुए थे, वेस्ट बंगाल के चुनाव हुए थे. 

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