उतर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. थाना ककरौली पुलिस ने फर्जी नर्सिंग डिप्लोमा, मार्कशीट और रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र तैयार कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह पिछले काफी समय से फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों को रोजगार दिलाने का खेल चला रहा था.

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के दौरान ककरौली पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी. इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि फर्जी डिप्लोमा और मार्कशीट तैयार कर बेचने वाले कुछ लोग जटवाड़ा चौकी क्षेत्र की नहर पटरी पर मौजूद हैं. सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर पांच आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया.

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भारी मात्रा में फर्जी प्रमाण-पत्र बरामद 

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने मेरठ स्थित न्यूटिमा हॉस्पिटल और हिम्स हॉस्पिटल में कार्रवाई करते हुए पांच अन्य आरोपियों को भी हिरासत में ले लिया. इस तरह कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी नर्सिंग डिप्लोमा, मार्कशीट और प्रमाण-पत्र बरामद किए हैं. इसके अलावा कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, फोटो पेपर, आईडी कार्ड और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है.

डेढ़ साल से कर रहे थे ये गोरखधंधा 

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले डेढ़ साल से फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहा था. दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए उन पर क्यूआर कोड भी लगाए जाते थे. गिरोह के सदस्य फर्जी डिप्लोमा और प्रमाण-पत्र तैयार कर उन्हें हजारों रुपये में बेचते थे, जबकि आगे इन्हें 25 हजार रुपये तक में बेचा जाता था. प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई महिलाओं और युवकों को उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में नर्सिंग और हेल्थ केयर क्षेत्र में रोजगार दिलाया गया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं. इस सराहनीय कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है.

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