बॉलीवुड फिल्मों में विभिन्न अवतारों में मां, जिसने सालों से हमें काफी कुछ अनुभव कराया
एजेंसी | 09 May 2020 09:53 PM (IST)
'मेरे पास मां' है यह सन 1975 में आई फिल्म 'दीवार' का वह मशहूर संवाद है, जिसने अभिनेता शशि कपूर को रातोंरात स्टारडम दिलाया और जिसने अमिताभ बच्चन के रूप में इंडस्ट्री को उनका नया एंग्री यंग मैन भी दिया।
'मेरे पास मां' है यह सन 1975 में आई फिल्म 'दीवार' का वह मशहूर संवाद है, जिसने अभिनेता शशि कपूर को रातोंरात स्टारडम दिलाया और जिसने अमिताभ बच्चन के रूप में इंडस्ट्री को उनका नया एंग्री यंग मैन भी दिया।
भारतीय सिनेमा में मांओ के किरदार को भिन्न अवतारों के रूप में पेश किया जाता रहा है। कभी उन्हें निरूपा रॉय के माध्यम से अपने अंदर ही अंदर घुटती हुई एक मां के रूप में प्रस्तुत किया गया, तो कभी एक ऐसी मां के रूप में दिखाया गया, जिसे अपनी एक खुद की पहचान की तलाश रहती है, जैसे कि फिल्म इंग्लिश विंग्लिश में श्रीदेवी द्वारा निभाया गया किरदार।
इस मदर्स डे को मातृत्व के हर एक रूप का जश्न मनाते हुए आइए, बड़े पर्दे के कुछ ऐसे ही किरदारों के साथ भी समय बिताते हैं, जिसने सालों से हमें काफी कुछ अनुभव कराया है। फ्लिपकार्ट वीडियो की ओर से हमारे साथ कुछ ऐसे ही शोज साझा किए गए हैं, जिन्हें आप अपनी मां के साथ देख सकते हैं और कुछ बेहतर पल बिता सकते हैं। इसके साथ ही आप उन्हें यह भी बता सकते हैं कि वे आपके लिए किस हद तक मायने रखती हैं।
पिन्नी
सुधा करीब साठ साल की उम्र की एक खुशहाल, मेहनती गृहिणी हैं और बराबर करेंट अफेयर्स से जुड़ी रहती हैं। इसके साथ ही वह गृहिणियों के लेकर रूढ़िवाद सोच के भी खिलाफ है। उस पर लोग तब तक ध्यान नहीं देते हैं, जब तक वह इन सबके? खिलाफ आवाज नहीं उठाती है। फिल्म हमारी जिंदगी में मां की महत्वपूर्ण भूमिका के संदेश के साथ खत्म होती है।
निल बटे सन्नाटा
यह एक विचारशील महिला चंदा की कहानी है, जिसकी ख्वाहिश अपनी बच्ची को बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक जिंदगी देने की है और इन सबके लिए अपनी बच्ची को पढ़ाई की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए वह खुद भी स्कूल में दाखिला ले लेती है। यह अपने बच्चे के प्रति उसकी मां के निस्वार्थ प्रेम को दशार्ता है, जो अपने बच्चे की बेहतर जिंदगी के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है।
इंग्लिश विंग्लिश
एक ऐसी महिला व मां की कहानी, जो अंग्रेजी भाषा बोल व समझ न पाने के चलते हमेशा सहमी हुई रहती है। बस इसी एक बात के चलते उसे उसके परिवार वाले भी उतनी अ?हमियत नहीं देते हैं, जितने की वह हकदार है। इसके बाद वह इस भाषा को जानने का ठान लेती है और सारी चुनौतियों का सामना कर खुद को सबके सामने साबित करती है।
मदर इंडिया
यह सभी महिलाओं को समर्पित है। मदर इंडिया दिल को मरोड़कर रख देने वाली विविध महिलाओं उर्फ मांओ की कहानी है। इसमें एक लालची साहूकार से लड़ते हुए एक मां अपने बच्चों की परवरिश के लिए हर एक संघर्ष का सामना करती है।