लखनऊ पुलिस ने 1 साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तानी महिला को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, महिला करीब एक साल से दर्ज मुकदमे में वांछित चल रही थी. इस मामले की जांच में विदेशी महिलाओं के भारत में कथित तौर पर फर्जी तरीके से रहने और उनकी पहचान बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं.

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इससे पहले फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की टीम ने इसी इलाके में दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं को संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा था. जांच के दौरान सामने आया कि दोनों महिलाएं 18 जून 2025 से न्यू हजरतगंज स्थित एक फ्लैट में रह रही थीं.

पूछताछ में दोनों महिलाओं ने बताया कि भारत आने के करीब दो साल बाद उनके पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज खो गए थे. हालांकि, जांच के दौरान उनके पास दस्तावेज खोने की पुलिस शिकायत की कॉपी भी नहीं मिली. जांच में महिलाओं के भारत में रहने और उनके दस्तावेजों को लेकर कई सवाल उठे.

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पहचान बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी

महिलाओं ने पूछताछ में बताया कि लोला कायूमोवा के जरिए उनकी मुलाकात पत्रकारपुरम और अहिमामऊ में मिनर्वा क्लीनिक चलाने वाले डॉ. विवेक गुप्ता से हुई थी. आरोप है कि डॉक्टर ने दोनों महिलाओं की प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े ऑपरेशन किए. इलाज के बदले डॉक्टर ने उनसे मोटी रकम ली. लेकिन, उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों के बारे में जानकारी नहीं ली गई.

पूछताछ में सामने आई ये बात

पूछताछ में त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा का नाम भी सामने आया. महिलाओं के मुताबिक, लोला कायूमोवा ने ही उनकी मुलाकात त्रिजिन से कराई थी. बताया गया कि त्रिजिन ओमेक्स आर-1 के फ्लैट नंबर 104 और 1103 में रहता है. महिलाओं ने दावा किया कि त्रिजिन और डॉ. विवेक गुप्ता की मदद से ही उन्हें न्यू हजरतगंज स्थित फ्लैट में ठहराया गया था. 

जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी किए बिना महिलाओं की पहचान बदलने के उद्देश्य से प्लास्टिक सर्जरी या ऑपरेशन कराए गए.

डीसीपी साउथ मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि मामले में संयुक्त टीम कार्रवाई कर रही है. उन्होंने कहा कि विदेशी महिलाओं से जुड़ा मुकदमा करीब एक साल पहले दर्ज हुआ था और अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है.

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