उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच भविष्य की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है. विभाग घाघरा नदी से करीब 1200 एमएलडी पानी लखनऊ लाने की संभावना पर मंथन कर रहा है. इसके लिए घाघरा से राजधानी तक करीब 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर तैयार किया जा रहा है.

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1200 एमएलडी का मतलब प्रतिदिन करीब 120 करोड़ लीटर पानी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर यह योजना अमल में आती है तो आने वाले वर्षों में लखनऊ की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिल सकती है.

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प्रस्ताव के मुताबिक घाघरा नदी से लखनऊ तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी. सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि घाघरा से छोड़ा गया पानी करीब छह घंटे में लखनऊ पहुंचेगा.

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लखनऊ की आबादी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में आने वाले समय में पानी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. सिर्फ भूजल पर निर्भर रहना लंबे समय के लिए उचित नहीं होगा. इसी वजह से सतही जल स्रोतों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.

पहले होगा पानी का शोधन

घाघरा नदी से आने वाले पानी की सीधे सप्लाई नहीं की जाएगी. इसके लिए बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने की योजना है. यहां पानी को पेयजल मानकों के अनुरूप शोधित करने के बाद आगे सप्लाई किया जाएगा. ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर भी विभिन्न विभागों के साथ चर्चा की जा रही है.

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सूखे तालाबों को बनाया जाएगा जल भंडारण केंद्र

सिर्फ पानी लाना ही नहीं, बल्कि उसको स्टोर करना भी योजना का अहम हिस्सा है. सिंचाई विभाग शहर और आसपास के इलाकों में मौजूद बड़े सूखे तालाबों को पुनर्जीवित करने पर भी विचार कर रहा है. इसमें बारिश का पानी स्टोर किया जाएगा.

परियोजना का तकनीकी और आर्थिक अध्ययन करने के लिए सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है. समिति पानी के स्रोत, परियोजना की लागत, पाइपलाइन, भूमि की जरूरत, पंपिंग सिस्टम और वितरण व्यवस्था समेत तमाम पहलुओं का अध्ययन करेगी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही परियोजना को आगे बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा.