उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी इस बार चुनावी रणनीति को ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि जमीन से तैयार करने की कोशिश में जुटी है. यानी बूथ स्तर से लेकर विधायक तक हर कड़ी का हिसाब लिया जाएगा. इसी सिलसिले में शनिवार को देहरादून में गढ़वाल मंडल के जिला और मंडल अध्यक्षों के साथ अहम बैठक हुई.
बीजेपी की रणनीति साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी भी स्तर की कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. पार्टी हर विधानसभा सीट पर यह पता लगाने में जुटी है कि कहां संगठन मजबूत है और कहां अभी और मेहनत की जरूरत है.
बैठक में बूथ स्तर की स्थिति से लेकर मंडल और विधानसभा स्तर तक संगठन के कामकाज की समीक्षा की गई. इसके साथ ही मंडल अध्यक्षों से उनके इलाके के विधायकों के कामकाज और जनता के बीच उनकी छवि को लेकर भी फीडबैक लिया जा रहा है.
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2022 के कमजोर बूथ बने बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती
बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद पूरे प्रदेश में बूथ स्तर पर समीक्षा कराई थी. इस समीक्षा में करीब 3000 ऐसे बूथ सामने आए थे, जहां पार्टी को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी थी. अब 2027 के चुनाव में यही बूथ बीजेपी की रणनीति के केंद्र में हैं.
पार्टी की कोशिश सिर्फ इन बूथों पर जीत हासिल करने की नहीं है, बल्कि वोटों के अंतर को भी बढ़ाने की है. इसके लिए स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर की स्थिति पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
हारी हुई 22 सीटों पर भी खास नजर
बीजेपी ने 2022 में जिन 22 विधानसभा सीटों पर हार का सामना किया था, वहां भी पार्टी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. इन सीटों की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री समेत प्रदेश नेतृत्व के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है.
अल्मोड़ा, द्वाराहाट, श्रीनगर और टिहरी जैसी सीटों पर पार्टी की खास नजर है. इन सीटों पर 2022 में जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था. ऐसे में बीजेपी मान रही है कि थोड़ी सी अतिरिक्त मेहनत से इन सीटों का नतीजा बदला जा सकता है.
बीजेपी इस बार संगठन और सरकार के कामकाज को अलग-अलग नहीं देख रही है. विधायकों की छवि, सरकार के काम, संगठन की मजबूती और बूथ स्तर के प्रदर्शन को एक साथ जोड़कर चुनावी तस्वीर तैयार की जा रही है.
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वहीं, कांग्रेस भी 2027 के लिए मैदान तैयार करने में जुटी है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे हैं. ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की शुरुआती तैयारियां तेज हो चुकी हैं. अब 2027 में जनता किस पार्टी पर भरोसा करती है, इसका फैसला चुनाव के वक्त ही होगा.
