लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें छात्रों से लेकर वहां काम करने वाले कर्मचारी और अन्य लोग शामिल थे. इस हादसे के बाद इमारत को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं. जिसमें बिल्डिंग के निर्माण से लेकर कई तरह की खामियां दिखाई दे रही हैं. ऐसे मं सवाल उठता है कि इतने जघन्य हादसे का गुनेहकार कौन हैं?

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15 जिंदगियों को भीषण आग में लील लेने वाली इस बिल्डिंग का निर्माण रेजिडेंशियल जरुरतों के लिए किया गया था लेकिन, इसका इस्तेमाल कमर्शियल एक्टिविटी के लिए किया जा रहा था. 2014 में बिना नियम कानून के ही इसे व्यवयासिक इमारत में तब्दील कर दिया गया. यहीं नहीं इमारत के लिए कभी फायर एनओसी तक नहीं ली गई. ये बिल्डिंग आज भी नगर निगम के दस्तावेजों में रेजिडेंशियल इमारत के तौर पर दर्ज है.  

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आवासीय इमारत को कमर्शियल में बदला?

दावा है कि इस तीन मंजिला इमारत को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन दो माह से भी कम वक्त में ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था. इसमें इमारत से जुड़े पुराने दस्तावेज और लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं. 

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अधिकारियों के अनुसार साल 2005 में यह इमारत विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज की गयी, जिसे 19 जनवरी 2013 को दम्पति ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया. इस इमारत का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था. बाद में इमारत में अनाधिकृत निर्माण की बात सामने आई. 

बिल्डिंग के नक्शे में भी मिली कई खामियां

इमारत में आग लगने के बाद लोग जान बचाने की गुहार लगा रहे थे. अंदर से चीखने की आवाजें आ रही थी लेकिन, रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही थी. इसकी सबसे बड़ी वजह थी इस बिल्डिंग का डिजाइन में खामी. इमारत में बाहर आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था. जहां आग और धुएं के वजह से रास्ता बाहर नहीं है. हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि अगर एक एग्जिट का दूसरा रास्ता होता तो लोगों की जान बच सकती थी. 

फायर एनओसी तक नहीं ली गई थी

इस बिल्डिंग के लिए फायर एनओसी भी नहीं लिया गया था. नियमों के मुताबिक जो बिल्डिंग 15 मीटर से कम ऊंची और 500 वर्ग मीटर से कम हो उसके लिए फायर का एनओसी लेना आवश्यक नहीं है. अगर इमारत में फायर सेफ्टी के इंतजाम होते तो समय रहते आग पर काबू पाया जा सकता था. 

लखनऊ अग्निकांड में सीएम योगी के आदेश पर लापरवाही बरतने के आरोप में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं. उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की जद में आयी इमारत के संयुक्त रूप से मालिक थे. 

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