उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए एक भीषण अग्निकांड ने एक हंसते-खेलते परिवार को जिंदगी भर का दर्द दे दिया है. इस दर्दनाक हादसे में 20 वर्षीय युवक सुखमनी की आग में झुलसने से मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल के बाहर का मंजर बेहद हृदयविदारक था, जहां अपने छोटे भाई को खोने के बाद उसका बड़ा भाई फूट-फूट कर रोता नजर आया.

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मृतक सुखमनी के बड़े भाई ने रुंधे हुए गले से मीडिया को बताया कि हादसे के वक्त उनके छोटे भाई ने ऑफिस से पिता को फोन किया था. उसने स्पीकर पर फोन रखकर सिर्फ इतना कहा था, "पापा बचा लो... यहां आग लग गई है, पापा मुझे बचा लो." यह उस बेटे के आखिरी शब्द थे. परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि स्थिति इतनी भयावह होगी.

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ट्रैफिक और दूरी ने छीन लिया भाई

सुखमनी के बड़े भाई ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि फोन आने के तुरंत बाद दोपहर करीब 2:00-2:30 बजे वे लोग आलमबाग स्थित अपने घर से निकले थे. लेकिन आलमबाग से अलीगंज पहुंचने में लगने वाले समय और रास्ते के कारण वे समय पर नहीं पहुंच सके. जब तक वे मौके पर पहुंचे, बहुत देर हो चुकी थी. भाई ने रोते हुए बताया कि "हमें अंदर उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया गया... और जब देखा, तब तक वह खत्म हो चुका था."

हाल ही में शुरू किया था करियर

जानकारी के मुताबिक, सुखमनी की उम्र मात्र 20 साल थी और वह अपने भाई से 3 साल छोटा था. उसने हाल ही में अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी और 3D एनिमेशन (3D Animation) का कोर्स किया था. कोर्स खत्म होने के बाद उसने इसी ऑफिस में टेस्ट दिया था और उसकी नौकरी लग गई थी. जिस करियर को उसने अभी उड़ान देना शुरू ही किया था, वह इस भयानक आग में जलकर खाक हो गया.

इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपातकालीन स्थिति में राहत कार्यों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है कि आखिर एक युवक ऑफिस में फंसा रहा और उसे बचाया क्यों नहीं जा सका.

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