भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली (Lord Buddha at Mahaparinirvana Sthali) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कुशीनगर (Kushinagar) में आज बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 2566वीं त्रिबिध पावन बुद्ध जयन्ती का आयोजन भव्य तरीके से होने जा रहा है. इसके साथ ही यह साल इतिहास के पन्नों में भी दर्ज होने जा रहा है. यह पहला मौका है जब भारत के प्रधानमंत्री वैशाख पूर्णिमा (Vaishakh Purnima) के दिन मुख्य मंदिर में भगवान बुद्ध (Lord Buddha) की पूजा-अर्चना करने आ रहे हैं.  

चूंकि बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी इसीलिए इसको त्रिबुद्ध पावनी बुद्ध पूर्णिमा कहते हैं. बौद्ध धर्म मानने वाले सभी देश इसको महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाते हैं. कुशीनगर में भगवान बुद्ध महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए थे. इसलिए यह स्थल बौद्ध धर्म में पवित्र स्थल मानी जाती है. इस अवसर पर यहां कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. 

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भगवान बुद्ध ने तीन संदेश दिया था-

॥ बुद्धम् शरणम् गच्छामि ॥

॥ धम्मम् शरणम् गच्छामि॥

॥ संघम् शरणम् गच्छामि ॥

आज पूरा विश्व इसी रास्ते पर चलने का प्रयास कर रहा है.

पीएम आ रहे हैं कुशीनगरबुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर आज प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं. पीएम पहले भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) जाएंगे और वहां से लौटते समय भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में पूजा करने आएंगे. पीएम के सरकारी कार्यक्रम के मुताबिक आज सायं 4.20 बजे से 4.30 बजे दस मिनट तक मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे.

क्या महत्व है इस दिन काबता दें कि बौद्ध धर्म अनुयायियों के लिए त्रिविध पावन बुध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) का विशेष महत्व होता है. आज ही के दिन भगवान बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था और आज ही के दिन बोध गया में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी हुयी थी और साथ ही आज के दिन कुशीनगर में उन्हें महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुयी थी. कुशीनगर बौद्धों के लिए बहुत ही पवित्र स्थान है. चार बौद्ध तीर्थों में कुशीनगर अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि कुशीनगर की इसी पवित्र धरती पर भगवान बुद्ध ने अपना अन्तिम श्वास लिया था और अंतिम संदेश के साथ यहीं महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था. 

बौद्ध धर्म का पवित्र त्योहारशांति की राह पर चलने वाले भगवान बुद्ध को समूचा विश्व गुरू मानता है. वैशाख पूर्णिमा बौद्ध धर्म के मानने वालों का एक पवित्र त्यौहार है और बौद्धिष्ठ इस त्यौहार को भव्यता के साथ मनाते हैं. साथ ही भगवान बुद्ध के बताए हुए मार्ग पर चलते हैं. भगवान बुद्ध ने ऐसा धम्म दिया है जो मध्यम मार्ग के नाम से जाना जाता है.

कुशीनगर का क्या महत्व हैबता दें कि कुशीनगर भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली के नाम से विश्व के मानचित्र पर स्थापित है. इतिहासकारों का मानना है कि 483 ईसा पूर्व भगवान बुद्ध यहां आए और महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए थे. इसीलिए बौद्ध धर्म में कुशीनगर का विशेष महत्व है. कुशीनगर में भगवान बुद्ध के 4 प्राचीन दर्शनीय स्थल हैं. इसके अलावे 13 बौद्धिष्ठ मंदिर है. हर साल बौद्ध धर्म के लाखो देशी-विदेशी अनुयाई यहां पूजा-अर्चन करने आते हैं. कुशीनगर में हर वर्ष विश्व के विभिन्न देशों के विदेशी पर्यटक यहां पूजन करने आते हैं. भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली को मुख्य मंदिर भी कहा जाता है. यहां विशेष पूजा अर्चना करके भगवान बुद्ध को चीवर चढ़ाया जाता है.

पीएम को पूजा कराने वाले भिक्षु ने क्या कहाआज प्रधानमंत्री की पूजा कराने वाले बौद्ध भिक्षु डॉ. नन्दरत्न थेरो बताते हैं कि इसी वैशाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध ने जन्म लिया ज्ञान प्राप्त कि और इसी दिन कुशीनगर में निर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इसलिए इसका विशेष महत्व है. हर साल इसे बौद्ध भिक्षुओं द्वारा भव्यता से मनाया जाता है. यह साल इतिहास के पन्ने में दर्ज होने जा रहा है. पहली बार भारत के प्रधानमंत्री यहां वैशाख पूर्णिमा पर पूजा अर्चना करने आ रहे हैं. उनकी पूजा के लिए विशेष व्यवस्था कराई गई है. विदेश से चीवर मंगाया गया है. पीएम की पूजा विशेष पूजा होगी. पूजा के बाद पीएम भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने के लिए सबको प्रेरित भी करेगें.

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