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कुशीनगर में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची में सुधार नहीं बल्कि यह गायब लिस्ट बनती जा रही है. जहां नाम जुड़ने चाहिए, वहां नाम कट रहे हैं. यहां एक विधायक के सगे भाई जो ग्राम प्रधान हैं, उनका और उनके परिवार का नाम ही मतदाता सूची से विलुप्त हो गया है. मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है.

वहीं अब इस मामले पर डीएम कुशीनगर बयान सामने आया है, डीएम ने कहा है कि यह SIR से संबंधित नहीं बल्कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूची से संबंधित मामला है. डीएम ने बताया है कि अवगत कराना है कि यह प्रकरण SIR से सम्बंधित नहीं है बल्कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूची से सम्बंधित है जिसमें दावे आपत्ति का कार्य वर्तमान में चल रहा है. नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जा रही है. कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित ना हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है.

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यह घटना कुशीनगर जिले के हाटा तहसील क्षेत्र के सुकरौली विकासखंड के रामपुर सोहरौना गांव की है. हाटा से बीजेपी विधायक मोहन वर्मा का पैतृक गांव यही रामपुर सोहरौना है. विधायक के भाई राजेंद्र वर्मा यहां से ग्राम प्रधान हैं. यहां नई वोटर लिस्ट ने ऐसा खेल कर दिया कि ग्राम प्रधान, उनकी पत्नी और बेटे - तीनों के नाम ही गायब हो गए हैं.

अब गांव में चर्चा यह नहीं कि चुनाव कब है, बल्कि चर्चा यह शुरू हो गई है कि SIR प्रक्रिया में विधायक के ग्राम प्रधान भाई के परिवार का नाम ही सूची से गायब कर दिया गया है. जैसे ही प्रथम मतदाता सूची प्रकाशित हुई, उसके बाद हड़कंप मच गया. नाम कटने की खबर मिलते ही आनन-फानन में बीएलओ और ग्राम सचिव ने बैठक बुला ली.

घंटों माथापच्ची, पर रहस्य बरकरार

सूचना पर ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए. घंटों माथापच्ची के बाद भी नाम कटने का रहस्य बना रहा. मतलब काटने वाला कौन, कैसे काटा - किसी को नहीं पता चल सका है. बीएलओ भी इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए कि आखिर यह नाम कैसे और क्यों काटे गए. ग्राम प्रधान राजेंद्र वर्मा का कहना है कि सिर्फ उनका ही नहीं, उनकी पत्नी और उनके बच्चे का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब है. उन्होंने कहा, "इसके साथ ही सैकड़ों लोगों का नाम नई वोटर लिस्ट से गायब हो चुका है. मैं मांग करता हूं कि यह नाम जोड़े जाएं." ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में 100 से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हो गए हैं. यह एक गंभीर मामला है.

विधायक ने कहा- साजिश होगी तो होगी जांच

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ग्राम प्रधान के भाई और हाटा विधानसभा से विधायक मोहन वर्मा का बयान सामने आया. बीजेपी विधायक मोहन वर्मा ने कहा, "डीएम और बीडीओ से मेरी बात हो गई है. उसमें सुधार कर लिया जाएगा. अगर साजिश के तहत नाम कटवाया गया होगा तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी." विधायक ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और यदि किसी की साजिश सामने आई तो कड़ी कार्रवाई होगी.

तकनीकी गड़बड़ी या राजनीतिक साजिश

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या वोटर लिस्ट में तकनीकी गड़बड़ी है या फिर राजनीति में नाम गायब कराने का नया खेल. यह मामला SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है. यदि एक ग्राम प्रधान और विधायक के भाई का नाम ही काटा जा सकता है, तो आम लोगों को क्या होगा.