लखनऊ. उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को झटका लगा है. बीजेपी के मौजूदा विधायक जन्मेजय सिंह का निधन हो गया है. देवरिया सदर से विधायक जन्मेजय सिंह (75) को पिछली रात हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें राजधानी लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. देर रात तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लोहिया संस्थान रेफर कर दिया गया.

लोहिया संस्थान के प्रवक्ता और एमएस डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक पेस मेकर लगाने के दौरान ही उनका निधन हो गया था. उनका कोरोना टेस्ट भी कराया गया था जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी. बताया जा रहा है कि वो पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे. जन्मेजय के निधन के बाद उनके समर्थकों में शोक की लहर है. उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव देवगांव लाया गया है.

सीएम योगी ने जताया दुख जन्मेजय सिंह के निधन पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, "देवरिया सदर विधान सभा क्षेत्र के विधायक श्री जन्मेजय सिंह के आकस्मिक निधन की खबर सुनकर शोक हुआ. श्री सिंह के निधन से पार्टी ने एक समर्पित कार्यकर्ता तथा जनता ने अपना सच्चा हितैषी खो दिया है. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों मे स्थान दें."

सपा ने टाला विरोध प्रदर्शन बीजेपी विधायक के निधन की खबर के बाद विपक्षी दल सपा ने अपना विरोध प्रदर्शन टालने का फैसला किया है. बतादें कि सपा नेता विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन जोरदार प्रदर्शन किया था. सपा के विधायकों ने सरकार को कानून व्यवस्था, अपराध, स्वास्थ्य व्यवस्था, कोरोना के इंतज़ाम, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेरते हुए प्रदर्शन किया. इन लोगों ने आजम खान को आजाद करने का भी मुद्दा उठाया. कई विधायक PPE किट पहनकर प्रदर्शन करते नज़र आये. इनका कहना था कि प्रदेश सरकार कोरोना के हालात से निपटने में असफल रही है.

लगातार दो बार विधायक रहे जन्मेजय सिंह जन्मेजय सिंह का जन्म 7 जुलाई 1945 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के देवगांव में हुआ था. उनके पिता त्रिलोकीनाथ सिंह किसान थे. उनकी पत्नी का नाम गुजराती देवी है. जन्मेजय सिंह के तीन बेटे और चार बेटियां हैं. जन्मेजय सिंह साल 2000 में पहली बार बसपा से उपचुनाव में गौरीबाजार विधान सभा से विधायक बने. फिर 2002 में आम चुनाव में सपा के साकिर अली से हार गए. 2007 में वे बीजेपी में शामिल हो गए. 2012 में वे बीजेपी की टिकट पर देवरिया विधानसभा से विधायक बने. परीसीमन के बाद विधानसभा गौरी बाजार खत्म कर देवरिया विधानसभा हो गई. 2017 के चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर देवरिया सदर सीट से चुनाव जीते.

ये भी पढ़ें:

कोरोना संकट के बीच शुरू हुआ यूपी विधानसभा का सत्र, सपा ने किया जोरदार प्रदर्शन

योगी आदित्यनाथ ब्राम्हण विरोधी होते तो मैं सांसद न होता: रवि किशन