जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और अलगाववादियों के कथित महिमामंडन को लेकर विवादों में घिरी पुस्तक "पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू एंड कश्मीर" के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है.
इस विवाद के बीच जम्मू के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में उपलब्ध सभी पुस्तकों की व्यापक समीक्षा कराने का आदेश जारी किया है. प्रशासन का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो कानून, राष्ट्रीय शिक्षा नीति या शैक्षिक मूल्यों के विपरीत हो.
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स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में होगी सभी किताबों की जांच
स्कूल शिक्षा निदेशक नसीम जावेद चौधरी की ओर से जारी सर्कुलर में निर्देश दिया गया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग संस्थानों के प्रमुख अपने-अपने परिसरों में मौजूद सभी पुस्तकों की समीक्षा कराएं. इसमें कार्यालय, कक्षाएं, स्टाफ रूम, पुस्तकालय और अन्य स्थानों पर रखी नई और पुरानी सभी किताबों की जांच शामिल होगी.
सर्कुलर के अनुसार, समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पुस्तक में ऐसी सामग्री न हो जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो, छात्रों के लिए अनुचित हो, या मौजूदा कानूनों, शैक्षिक मूल्यों और स्थापित मानकों का उल्लंघन करती हो. साथ ही सभी पुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के आयु-उपयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए.
आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्थान में कोई आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है तो संबंधित संस्थान प्रमुख को पुस्तक का नाम, लेखक, प्रकाशक और उपलब्ध प्रतियों की संख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी. यह रिपोर्ट अनुपालन प्रमाण पत्र के साथ संबंधित जोनल एजुकेशन ऑफिसर को निर्धारित समय सीमा के भीतर भेजनी होगी.
सभी सरकारी और निजी संस्थानों के प्रमुखों को प्रमाणित करना होगा कि उनके परिसर में मौजूद सभी पुस्तकों की पूरी तरह जांच कर ली गई है और वहां कोई आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध नहीं है. यदि किसी पुस्तक में विवादित सामग्री मिलती है तो उसका अलग से विस्तृत विवरण देना अनिवार्य होगा.
समय सीमा तय, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सर्कुलर के अनुसार, संस्थानों को समीक्षा पूरी कर निर्धारित अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित जोनल एजुकेशन ऑफिसर को भेजनी होगी. इसके बाद जोनल एजुकेशन ऑफिसर सभी रिपोर्टों का सत्यापन कर उन्हें संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) को भेजेंगे. मुख्य शिक्षा अधिकारी समेकित रिपोर्ट तैयार कर स्कूल शिक्षा निदेशालय को सौंपेंगे.
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और सभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाएगा. निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ लागू नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
इससे पहले विवादित पुस्तक को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन आठ कर्मचारियों को निलंबित कर चुका है. वहीं, पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट भी मामले में जांच और छापेमारी की कार्रवाई कर रही है. सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में केवल ऐसी अध्ययन सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए जो संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और देश के कानूनों के अनुरूप हो.
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