अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर मचे घमासान के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की सोमवार को एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूर कर लिया गया. बैठक के बाद ट्रस्ट ने दान में मिली राशि और उसे खर्च किए जाने का ब्योरा भी पेश किया.

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22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का उद्घाटन किया था, जिसके बाद से भारी मात्रा में मंदिर में चढ़ावा आ रहा है. सोमवार को हुई  बैठक के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने इस पूरी धनराशि का ब्योरा देते हुए बताया कि निधि योगदान अभियान और कार्पस दान के ज़रिए ट्रस्ट को 3,264 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 2,370 करोड़ रुपयों का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय के लिए हुआ. 

सोमवार को ट्रस्ट ने दिया चढ़ावे का ब्योरा

राम मंदिर की स्थापना से 31 मार्च 2026 तक कुल 582 करोड़ रुपये दान में मिले, जिसमें 391 करोड़ रुपये परिचालन में खर्च हुए. बची हुई धनराशि बैंक खातों में जमा है. वहीं ट्रस्ट ने मंदिर को मिले कीमती आभूषण और सोने-चांदी की वस्तुओं का भी ब्योरा रखा. इस पूरे विवाद में अब तक आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जबकि ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है. 

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चढ़ावा चोरी से चंपत राय के इस्तीफे तक टाइमलाइन

आइए आपको राम मंदिर चढ़ावा चोरी से लेकर चंपत राय का इस्तीफा मंजूर होने तक की पूरी टाइम लाइन बताते हैं कि इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है- 

12 जून 2026– राम मंदिर चढ़ावे में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई, जिसके बाद इस मामले में की जांच की मांग उठी.

13 जून 2026 – श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया. जांच में दान गिनने वाले कर्मचारियों और उनके नेटवर्क की पड़ताल शुरू हुई.

20 जून 2026 के आसपास – एसआईटी ने लगभग 150 संदिग्धों की पहचान की और कई आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नकदी व अन्य सामान की बरामदगी की.

25 जून 2026 – पुलिस ने दान चोरी के मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें चंपत राय के ड्राइवर का नाम भी सामने आया.

26 जून 2026 – ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने इस्तीफे सौंप दिए, ताकि जांच निष्पक्ष रूप से हो सके. हालांकि उस समय उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी और न ही उन्हें आरोपी बनाया गया था.

27–30 जून 2026 – एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के बयान दर्ज किए. इसी दौरान विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि चंपत राय जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनका नाम एफआईआर में नहीं है.

3 जुलाई 2026 – ट्रस्ट की बैठक से पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा से लिखित एवं मौखिक स्पष्टीकरण लेने की तैयारी की खबरें सामने आईं.

6 जुलाई 2026 – ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया. साथ ही नए महासचिव की नियुक्ति और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव पर भी निर्णय लिया गया. 

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